इसकी जानकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा तक पहुंची थी। तब कुछ लोगों ने उनसे इस बारे में पूछा भी था। वहीं, कुछ ऐसे भी लोग थे, जो सभी को गणना के काम से हटाने की सिफारिश कर रहे थे, लेकिन तब चंपत, अनिल और गोपाल ने सभी का बचाव कर लिया था। जिससे ये सभी बच गए थे। वरना उसी दौरान सभी पकड़े जाते। वहीं, आरोपियों ने एक बार फिर दोहराया कि वह किस तरह से नकदी पार कर वहां से निकल जाते थे। फिर बंटवारा करते थे। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के करीबी होने की वजह से उनसे कोई पूछताछ नहीं होती थी और न ही तलाशी ली जाती थी।
अनिल को फिर ठहराया जिम्मेदार
सूत्रों के मुताबिक, टिन्नू ने एक बार फिर अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया है। वह खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसके पास देखरेख की जिम्मेदारी थी। चाबी भी रहती थी, लेकिन दान राशि की गणना से लेकर जमा कराने में अनिल मिश्रा की भूमिका रहती थी। एक तरह से वह अनिल पर आरोप थोपता रहा। वहीं, चंपत राय के बचाव में जुटा रहा।
रामचरितमानस की स्वर्णयुक्त प्रति आभूषण कोठरी में सुरक्षित
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि लगभग दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी लक्ष्मीनारायण की ओर से भेंट की गई सोने से युक्त श्रीरामचरितमानस सुरक्षित है। पूर्व आईएएस ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक इंटरव्यू में आशंका जताई थी कि करीब 5 करोड़ की लागत से निर्मित सोने की रामायण जो उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट को भेंट की थी, वह भी चोरी हो गई है। इसके बाद रविवार को राम मंदिर निर्माण सहायक गोपाल राव ने जानकारी दी कि दानदाता की इच्छा के अनुरूप इसे पहले श्रीरामलला के गर्भगृह के सामने सम्मानपूर्वक रखा गया था।
जांच में खुलासा बैंक की लापरवाही
चोरी के पीछे बड़ी लापरवाही बैंक की भी रही। ये बात पहले ही सामने आ चुकी है। अब पता चला है कि जिस एसबीआई की बैंक की अयोध्या धाम शाखा में जब चढ़ावे की रकम जमा की जाती तो कई बार ऐसा हुआ कि वह रकम रखने की जगह ही नहीं थी। तब आनन-फानन में बैंक अधिकारी रकम को अन्य शाखाओं में भेजते थे। इतनी बड़ी रकम को लेकर इस तरह की लापरवाही भी बरती जाती थी।
क्या किसी नेता से भी है कनेक्शन?
एक चर्चा ये भी कि कुछ आरोपी राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं से भी जुड़े थे। इन स्थानीय नेताओं से टिन्नू व एक दो अन्य की लगातार बातचीत होती रहती थी। इनमें से एक ने नेता तक चोरी की सूचना पहुंचाई, जिससे बड़ा बवाल हो गया लेकिन, उसको ये पता नहीं था कि वह खुद फंस जाएगा। हालांकि ये सिर्फ चर्चा है किसी भी तरह से इसकी पुष्टि नहीं है।
गोविंद देव की सफाई, इशारों में चंपत और अनिल पर सवाल
मामले पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने एक बयान जारी किया। इसमें उन्होंने बताया कि वह लेनदेन, बैंकिंग और गणना प्रक्रिया से किस तरह दूर रहते थे। गोविंद देव की इस सफाई में कहीं न कहीं चंपत राय और अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी होने की तरफ इशारा है। एक तरह से उन्होंने इन दोनों पर उठे सवालों को और पुख्ता कर दिया है। गोविंद देव ने लिखा है कि मंदिर की तरफ से होने वाला खर्च सीधे बैंक से किया जाता था। इसके लिए वह हस्ताक्षर करने के अधिकृत नहीं थे। उनके पास कोई चेकबुक भी नहीं थी। मतलब स्पष्ट है कि गोविंद देव का कहना है कि वित्तीय लेनदेन आदि में उनकी कोई भूमिका नहीं रहती थी।
वहीं, गणना प्रक्रिया को लेकर कहा है कि इस प्रक्रिया से उनका कोई संबंध नहीं रहा। वह अधिकतर पुणे में ही रहते हैं, जबकि गणना की प्रक्रिया रोजाना चलती है। इसके लिए एसओपी बनी है, जिसमें बैंक और अन्य ट्रस्टियों की भूमिका रहती है। इस तरह उन्होंने गणना प्रक्रिया से भी खुद को अलग कर लिया। इससे स्पष्ट होता है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका इन सभी कार्यों में रहती थी। यह बात किसी और ने नहीं, बल्कि बिना नाम लिए अपनी सफाई में गोविंद देव गिरी ने ही इशारों में कही है। इससे पहले ट्रस्ट के सदस्य महंत नृत्यगोपाल दास ने भी सवाल उठाए हैं। कुल मिलाकर, जिन आरोपों को लेकर तमाम लोगों ने सवाल उठाए हैं, उनकी गूंज कहीं न कहीं ट्रस्ट के भीतर से भी सुनाई दे रही है, भले ही कुछ लोग इसे स्पष्ट रूप से न कह रहे हों।