याचिका में पिछले कई ऐसे हादसों का जिक्र किया गया जिनमें स्कूली वाहनों के चालकों की लापरवाही या फिर खराब मौसम की वजह से हुई दुर्घटनाओं में बच्चों व लोगों को जान गंवानी पड़ी। याची का कहना था कि स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों व संबंधित निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। जाड़े या फिर अन्य खराब मौसम में स्कूल बंद करने के डीएम के आदेशों का जिलों में सख्ती से पालन कराने की भी गुजारिश याचिका में की गई थी।
अदालत की सख्त टिप्पणी, महज कागज पर उठाए प्रभावी कदम
उधर, राज्य सरकार के जवाबी हलफनामे में कहा गया कि स्कूली बसों की फिटनेस जांच व पंजीकरण के लिए नीति बनाकर विस्तृत दिशा-निर्देश सरकार ने जारी किए हुए हैं।
इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, याचिका में जिक्र किए गए हादसों से ऐसा लगता है कि ज्यादातर स्कूली बसों में इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। सरकार ने महज कागज पर प्रभावी कदम उठाए हैं। ऐसे में अब प्रमुख मुद्दा इन दिशा-निर्देशों के अमल का है।