रेलनीर अब एक रुपये सस्ता कर दिया गया है, लेकिन चारबाग व लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को स्टॉल संचालक अब भी 15 रुपये में बोतल बेच रहे हैं। यात्रियों ने सोशल मीडिया पर ओवरचार्जिंग की शिकायत उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के डीआरएम से की है। अनुज सक्सेना ने बताया कि वह अपने मित्र को स्टेशन छोड़ने चारबाग पहुंचे थे, जहां प्लेटफॉर्म पर उनसे रेलनीर के लिए 15 रुपये लिए गए। ऐसे ही जंक्शन पर शताब्दी एक्सप्रेस से प्लेटफॉर्म पर पहुंचे यात्री ने भी ओवरचार्जिंग की शिकायत की है। खास बात यह है कि स्टॉल संचालक पहले जहां पांच रुपये ओवरचार्ज कर रहे थे, वह अब यह धनराशि यात्रियों से नहीं ले रहे हैं। दूसरी ओर, चारबाग व लखनऊ जंक्शन पर आरपीएफ प्रशासन ने प्लेटफॉर्मों पर चेकिंग अभियान चलाकर पड़ताल भी की।
दरअसल, रेलवे ने रेलनीर की एक लीटर की बोतल 15 के बजाय 14 रुपये व आधा लीटर की बोतल 10 की जगह नौ रुपये में कर दी गई है। नए मूल्य को लेकर सीनियर डीसीएम ने आदेश भी जारी किया है। वेंडरों को चेतावनी भी दी है कि अधिक मूल्य लेने पर कार्रवाई की जाएगी। स्टेशनों पर रेलनीर के अतिरिक्त पानी की अन्य बोतलों पर भी एक रुपये की छूट दी गई है।
जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद चिकित्सा संस्थानों के हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) काउंटर से मिलने वाली दवाएं भी सस्ती हो गई हैं। दवाओं की कीमतों में सात से 13 फीसदी तक की कमी आई है। अभी तक अलग-अलग दवाओं और सर्जिकल उपकरणों पर 12, 18 और पांच प्रतिशत जीएसटी लगता था जो अब पांच प्रतिशत किया गया है। इसके साथ ही पांच फीसदी वाली दर को शून्य किया गया है। राजधानी के केजीएमयू, लोहिया, पीजीआई और कैंसर संस्थान में एचआरएफ की व्यवस्था है।
27 हजार तक कम हो गई दवा की कीमत
कल्याण सिंह अतिविशिष्ट कैंसर संस्थान के निदेशक प्रो. एमएलबी भट्ट ने बताया कि जीएसटी कम होने से मरीजों के लिए दवाएं सस्ती हो गई हैं। उदाहरण के तौर पर स्तन कैंसर मरीजों के लिए दी जाने वाली फेस्गो 1200 मिग्रा इंजेक्शन की कीमत 3,93,742 रुपये थी। इस पर जीएसटी 12 फीसदी था, जो अब पांच फीसदी हो गया है। इससे इस इंजेक्शन की कीमत 27,562 रुपये कम हो गई है। इसी तरह मूत्राशय कैंसर के उपचार में प्रयुक्त एवेल्युमैब इंजेक्शन की कीमत में 8,520 रुपये की कमी आई है।