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केजीएमूय में हुआ पहला कैडवर लिवर ट्रांसप्लांट

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सुल्तानपुर की महिला का लिवर मेरठ के युवक को प्रत्यारोपित
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एक और सफलता : केजीएमयू में पहली बार हुआ कैडवर लिवर प्रत्यारोपण
25 जून को महिला के ब्रेन डेड होने पर हुई आर्गन डोनेशन की पहल
09 माह से लिवर सिरोसिस से जूझ रहा था युवक, अब स्थिति में सुधार
केजीएमयू ने एक और उपलब्धि हासिल की है। तीन लिवर प्रत्यारोपण के बाद अब यहां कैडवर लिवर प्रत्यारोपण किया गया है। केजीएमयू में यह पहली बार हुआ है। इसमें सुल्तानपुर की महिला का लिवर मेरठ के युवक को प्रत्यारोपित किया गया। युवक की स्थिति में सुधार है और वह होश में आ गया है।
सुल्तानपुर के गोसाईसिंहपुर निवासी हरि प्रसाद की पत्नी वंदना (35) नौ जून को बहन के साथ बाजार जा रही थीं। बाइक से टक्कर लगने से वह घायल हो गईं। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बलरामपुर अस्पताल और फिर 12 जून को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग की टीम ने ऑपरेशन किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। 25 जून को ब्रेन डेड होने पर ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर पीयूष श्रीवास्तव, शिक्षित वर्मा व सोशल वर्कर अश्वनी सिंह ने परिवारीजनों से आर्गन डोनेशन की बात की। उनके तैयार होने पर वंदना का लिवर और कार्निया सुरक्षित रख लिया गया।
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यही लिवर मेरठ के 32 वर्षीय युवक को प्रत्यारोपित किया गया। वंदना और उसका ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव था। युवक करीब नौ माह से लिवर सिरोसिस से जूझ रहा था। मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे से शुरू हुई प्रत्योरपण की प्रक्रिया बुधवार तड़के चार बजे तक चली। कैडवर से प्राप्त लिवर का प्रत्यारोपण केजीएमयू में पहली बार किया गया है। हालांकि यहां आर्गन डोनेशन की प्रक्रिया वर्ष 2013 से चल रही है। अब तक 19 मल्टी आर्गन डोनेशन कराए जा चुके हैं। यह 20वां डोनेशन हैं। यहां से डोनेट कराए जाने वाले मल्टी आर्गन दूसरे संस्थानों को भेजे जाते थे।
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ये थे प्रत्यारोपण करने वाली टीम में
सर्जिकल गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. प्रदीप जोशी, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अनीता मलिक, डॉ. मोहम्मद परवेज, डॉ. एहसान सिद्दीकी, क्रिटिकल केयर के डॉ. अविनाश अग्रवाल, डॉ. आर्मिन अहमद, रेडियोलाजी विभाग के डॉ. रोहित, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की डॉ. तुलिका चंद्रा, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. अमिता जैन, डॉ. प्रशांत, डॉ. शीतल वर्मा, पैथोलॉजी विभाग के डॉ. अतिन, डॉ. वाहिद, कार्डियोलॉजी के प्रो. वीएस नारायण, डा. गौरव चौधरी, पल्मोनरी के डॉ. सूर्यकांत, डॉ. दर्शन बजाज, सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार, एमएस डॉ. बीके ओझा, डॉ. ओपी सिंह प्रत्यारोपण करने वाली टीम में थे। इसके अलावा मैक्स के डॉ. शालीन अग्रवाल, डॉ. वैभव भी थे। कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि ट्रांसप्लांट के लिए आर्डिनेटरों की अहम भूमिका रही, जो परिवारीजनों को यह समझाने में सफल रहे हैं कि अंगदान से दूसरे मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
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