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UP:: बच्चों के अस्पताल में लगी भीषण आग, मच गई भगदड़

Thu, 31 Mar 2016 11:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
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हजरतगंज चौराहे पर स्थित झलकारीबाई अस्पताल के नियोनेटल यूनिट के स्टोर में बुधवार की रात नौ बजे के करीब अचानक आग लग गई। घटना के दौरान सेकंड फ्लोर पर स्थित एनआईसीयू में दस बच्चे भर्ती थे। इनमें से अधिकतर बच्चों को ऑक्सीजन लगी थी।
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कमरे के रोशनदान से अचानक धुआं निकलते देखकर नियोनेटल यूनिट में भगदड़ मच गई। वहां मौजूद महिलाएं अपने-अपने शिशुओं को लेकर भागने लगीं। सिस्टर सिंधु मिश्रा ने अस्पताल के सीएमएस डॉ. आनंद प्रकाश और यूनिट के इंचार्ज डॉ. नीलांबर श्रीवास्तव को आग लगने की सूचना दी।

इसी बीच शाकिर नाम के एक युवक ने 100 नंबर पर आग लगने की सूचना दी। 15 मिनट के अंदर ही वहां फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां पहुंच गईं और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
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एनआईसीयू, वार्ड नंबर दो, थर्ड फ्लोर के सभी बच्चों को नीचे के वार्डों में शिफ्ट किया जा चुका था। इसी बीच डीएम राजशेखर व सीएमओ डॉ.एसएनएस यादव भी झलकारीबाई अस्पताल पहुंच गए।

बच्चों की जान बचाने के लिए भागने लगे माता-पिता

अपने बच्चों को लेकर सुरक्षित स्‍थान पर पहुंची महिलाएं - फोटो : amar ujala
बुधवार रात लगभग नौ बजे झलकारीबाई के सेकंड फ्लोर पर स्थित एनआईसीयू में सिस्टर सिंधु मिश्रा ड्यूटी पर थीं। डॉ. सोनल अग्रवाल राउंड लेकर ले रही थीं। तभी अचानक वहां ‘आग लग गई’ का शोर मच गया। एनआईसीयू में भर्ती मरीजों के परिवारीजन भी अचानक आग लगने के शोर से घबरा गए।

मंजू शुक्ला नाम के एक मरीज के परिवारीजन ने बताया कि अंदर एक कमरे में ताला लगा था, उसी के रोशनदान से धुआं निकलना शुरू हुआ था। अचानक धुआं निकलने से वहां भर्ती सभी 10 बच्चों की जान बचाने के लिए परिवारीजन अंधाधुंध भागने लगे।

उसी फ्लोर पर 25 प्रसूताएं भर्ती थीं
एनआईसीयू में भर्ती किसी को नवजात को ऑक्सीजन लगी थी तो किसी की नाक में फूड पाइप लगा था तो किसी बच्चे के पीलिया के इलाज के लिए मशीन का सपोर्ट दिया गया था। सेकंड फ्लोर पर ही स्थित वार्ड नंबर दो में भी 25 प्रसूताएं भर्ती थीं। यही हाल थर्ड फ्लोर का था। वहां पर चार प्राइवेट और 10 जनरल वार्ड के बेड थे। वहां भर्ती प्रसूताओं को हड़कंप के बीच किसी तरह नीचे उतारा गया।

किसी तरह वार्ड खाली कराकर शिफ्ट की गईं महिलाएं

घटनास्‍थल पर पहुंचे जिलाधिकारी राजशेखर - फोटो : amar ujala
सीजेरियन प्रसव के कारण वहां भर्ती महिलाओं को इस भागदौड़ में खासी दिक्कत हुई। किसी तरह ग्राउंड फ्लोर के तल पर स्थित वार्ड को खाली कराकर बच्चों और उनकी मांओं को शिफ्ट किया गया।

चारों तरफ भर गया काला धुआं
स्टोर के अंदर लगी आग के कारण निकले धुएं से पूरे फ्लोर पर काला धुआं भरा हुआ था। इसके चलते वहां कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। फायर ब्रिगेड के सिपाहियों को स्टोर तक पहुंचने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।

किसी तरह पूरी तरह से एयर कंडीशंड होने के धुआं निकलने में भी दिक्कत आ रही थी। किसी तरह डेढ़ घंटे तक चली मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
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एक बच्ची को भेजा ट्रॉमा सेंटर

अस्पताल में भरा धुंआ - फोटो : amar ujala
एनआईसीयू में भर्ती एक दिन की बच्ची को डीएम के निर्देश पर ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट किया गया। जुलेखा नाम की महिला ने मंगलवार को 3.40 बजे इस बच्ची को जन्म दिया था। समय से पहले पैदा होने के कारण बच्ची को सांस लेने में दिक्कत थी। इसीलिए उसे ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया था।

उसकी हालत गंभीर देखते हुए डीएम ने केजीएमयू प्रशासन से बातचीत की और उसे अस्पताल की एंबुलेंस से ट्रॉमा सेंटर शिफ्ट कराया। एक अन्य बच्ची को भी ट्रॉमा सेंटर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी।

डीएम राजशेखर ने बताया कि बेबी ऑफ जुलेखा पूरी तरह से सुरक्षित है। समय से पहले पैदा होने के कारण उसे सांस लेने में दिक्कत थी। बेहतर इलाज के लिए उसे ट्रॉमा सेंटर के बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया है।

इन प्रसूताओं के बच्चे थे एनआईसीयू में
बेबी ऑफ नीतू पांडेय--लखीमपुर
बेबी ऑफ आरती सिंह--गोसाईगंज
बेबी ऑफ नेहा--निलमथा
बेबी ऑफ अंजू वर्मा--मोहनलालगंज

बेबी ऑफ रंजना--उतरठिया
बेबी ऑफ अफसाना--ठाकुरगंज
बेबी ऑफ शहनाज--मानस विहार कालोनी
बेबी ऑफ रेनू--अमेठी
बेबी ऑफ अनवरी--बाराबंकी।
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