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हॉस्पिटल में धमाके के बाद आग, मचा हड़कंप

Wed, 02 Oct 2013 08:29 PM IST
अनिल त्रिपाठी/लखनऊ
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विवेकानंद अस्पताल में बुधवार अपराह्न आईसीयू के सर्वर रूम में विस्फोट के साथ बैटरी फटने से आग लग गई।
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बैटरी दगने की आवाज इतना जबरदस्त था कि अस्पताल में हड़कंप मच गया और चारों ओर धुआं भर गया।

आग से एक एसी भी जल कर राख हो गई है। आग लगने की सूचना पर अस्पताल में भर्ती मरीज व तीमारदारों में भगदड़ मच गई।

तीमारदार अपने-अपने मरीज लेकर बाहर निकल कर सड़क पर आ गए। आग बुझाने के चक्कर में अस्पताल का एक कर्मचारी भी घायल हो गया। सूचना पर पुलिस व दमकल समेत दमकलकर्मियों मौके पर पहुंच गए।

दमकलकर्मियों ने आईसीयू में भर्ती पांच बच्चों को बाहर निकाला। बाद में, दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद फायर कर्मियों ने आग पर काबू पाया।

वाकया अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे का है। महानगर कोतवाली क्षेत्र स्थित विवेकानंद अस्पताल में आईसीयू के बगल में सर्वर रूम है। सर्वर रूम से अस्पताल के आईसीयू व आपरेशन थियेटर को आपरेट किया जाता है। सर्वर रूम में यूपीएस व उसकी बैटरियां रखी थी।
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आईसीयू में करीब 10-12 मरीज भर्ती थे। अस्पताल कर्मचारी अपने काम में व्यस्त थे। पुलिस के मुताबिक, अचानक प्रेशर बढ़ने से बैटरी गरम हो गई और विस्फोट के साथ फट गई। बैटरी फटने की आवाज इतनी जबरदस्त थी कि अस्पताल में हड़कंप मच गया।

कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही सर्वर रूम में आग लग गई। आईसीयू व आपरेशन थियेटर और उसके आसपास धुआं भर गया। मरीजों का दम घूटने लगा। मरीज वार्डों से निकलकर सड़क पर आ गए। सूचना पर हजरतगंज फायर स्टेशन से तीन दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई।

दमकलकर्मियों व अस्पताल कर्मचारियों ने शीशा तोड़कर आईसीयू में भर्ती पांच बच्चों को बाहर निकाला। दमकलकर्मियों ने अन्य मरीजों को भी सुरक्षित स्थान में पहुंचाने में मदद की। आग से एक एसी भी जल कर राख हो गई। दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाया।

अग्निशमन विभाग के एफएसओ चंद्रशेखर यादव का कहना है कि, सर्वर रूम में यूपीएस की बैटरी के फटने से आग लगी थी। नियमानुसार, आईसीयू के पड़ोस में सर्वर कक्ष नहीं होना चाहिए।

इसके लिए अस्पताल प्रशासन को नोटिस दिया गया है। हालांकि, अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम काम कर रहा था। अस्पताल कर्मचारियों की मदद से ही आग पर काबू पाने में सफलता मिली है।
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बड़ा हादसा टला
दमकलकर्मियों की मानें तो विवेकानंद अस्पताल में जिस तरह आग लगी थी अगर जरा देर हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। दरअसल, सर्वर रूम से सटा आईसीयू में 10-12 मरीज भर्ती थे। सर्वर कक्ष में आग लगने का असर आईसीयू तक पहुंचता तो मरीजों के लिए खासा दिक्कत पैदा कर देता।
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