हमारे नेता सियासत के अखाड़े के भले ही पुराने खिलाड़ी हों, लेकिन उनसे भी कुछ ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जो उनसे अपेक्षित नहीं होती हैं।
हालांकि वे इसे गलती नहीं मानते हैं और अपने बचाव में कुछ ऐसा बयान दे देते हैं, जिसे सुनकर यह नहीं कहा जा सकता है कि ये माननीय राजनीति के पुराने चावल हैं।
ताजा मामला कांग्रेसी नेता से जुड़ा है। कांग्रेस प्रत्याशी कुर्ते पर पार्टी के चुनाव चिन्ह का बैच लगाकर वोट देने चले गए।
ज्यों ही खबर मीडिया में आई, हो-हल्ला मच गया। बात निर्वाचन अधिकारी तक पहुंची और उन्होंने वीडियो फुटेज देखकर उन्होंने उन पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए।
अब साहेब को अपने बचाव में कुछ तो कहना ही था। सो, उन्होंने बड़े मासूमियत से कहा...मेरा ध्यान कुर्ते पर लगे निशान पर नहीं गया। जो कुर्ता दो दिन पहले पहना था वही पहनकर वोट देने चला गया।
अब 15 साल से राजनीति से जुड़े रहने के बाद साहेब का इस तरह आचार संहिता का उल्लंघन करना, और फिर तर्कहीन जवाब देना हंसी का ही पात्र है।
अब साहेब को कोई मासूम कैसे मान ले...आखिर एके 47 वाला मसला भी तो इनसे ही जुड़ा है।