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बीबीएयूः गहरा रहा आर्थिक संकट, नहीं बनाए नए स्रोत

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बीबीएयू में तीन महीने से नहीं मिला आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का वेतन। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
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अक्षय कुमार
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केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान होने के बाद भी बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में साल दर साल आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
कारण साफ है कि विवि प्रशासन ने आय के नए स्रोत नहीं विकसित किए। इसका असर विवि के विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है।
यही नहीं, आउटसोर्सिंग कर्मचारी तो काफी लंबे समय से वेतन का संकट झेल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह अन्य शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए भी संकट खड़ा कर सकता है।
कोरोना संक्रमण काल में विश्वविद्यालय लगभग दो साल विद्यार्थियों के लिए बंद ही रहा है। वर्तमान में भी फर्स्ट सेमेस्टर की ऑनलाइन कक्षाएं हुईं और बृहस्पतिवार से ऑनलाइन परीक्षा भी आयोजित की जा रही है।
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विद्यार्थियों के कैंपस में न होने से छात्रावास, लैब से लेकर क्लास रूम तक के खर्चे कम हुए हैं। इसके बावजूद विवि का आर्थिक संकट कम नहीं हुआ है।
हालत यह है कि फीस से होने वाली आय भी विद्यार्थियों की सुविधाओं की जगह वेतन पूरा करने में चली जा रही है। पिछले दिनों विद्यार्थियों ने धरना-प्रदर्शन कर लाइब्रेरी में सुविधाएं देने की मांग उठाई थी।
पिछले कुछ वर्षों में यूजीसी से मिलने वाले फंड में कटौती हुई है। इसका असर वेतन पर पड़ रहा है। विवि के आर्थिक संकट का सबसे ज्यादा असर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर पड़ा है।
कोविड काल में सौ से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मचारी हटाए भी जा चुके हैं। फिर भी विवि का आर्थिक संकट कम नहीं हुआ है।
कभी तीन, कभी चार, कभी पांच-छह महीने के वेतन का संकट उनके सामने अक्सर खड़ा रहता है। वर्तमान में भी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को तीन महीने का वेतन नहीं मिला है।
यही नहीं विवि प्रशासन ने हाल में आउटसोर्सिंग से कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली एजेंसी भी दो बार बदली है।
इसके बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ बल्कि दोबारा कुछ और कर्मचारियों को कम किया गया है। आय के नए स्रोत न बना पाने का असर विश्वविद्यालय के विकास पर भी पड़ा है।
विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति प्रो. आरसी सोबती के समय से बन रहा स्टूडेंट एक्टिीविटी सेंटर का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
प्रदेश सरकार के सहयोग से एक महिला छात्रावास का निर्माण हो गया लेकिन एक अन्य पुरुष छात्रावास का काम अभी लंबित ही है। जिससे अभी भी पर्याप्त विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा नहीं मिल पाती है।
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पूर्व में एजेंसी द्वारा जो भी बिल दिए गए थे, उनका भुगतान किया जा चुका है। वर्तमान में नई एजेंसी मार्च से काम कर रही है। उसके द्वारा जब बिल दिया जाएगा तो विश्वविद्यालय उसका भुगतान करेगा। विश्वविद्यालय के स्तर पर कर्मचारियों के वेतन की चीजें लंबित नहीं है।
- प्रो. गोपाल सिंह, मीडिया सेल के चेयरमैन, बीबीएयू
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