सपा में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद अब पार्टी पर दावे को लेकर घमासान जारी है, जिसके निपटारे के लिए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव अब चुनाव आयोग पहुंच गए हैं।
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वहीं, आयोग ने अखिलेश खेमे के राम गोपाल यादव को मंगलवार सुबह 11:30 बजे मिलने का वक्त दिया है। अब दोनों ही खेमे पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर दावा करेंगे, जिसका फैसला आयोग करेगा।
हालांकि, विवाद बढ़ने की हालत में आयोग सपा के चुनाव चिन्ह साइकिल को सीज कर सकता है और अलग पार्टी बनाने की स्थिति में दोनों को नया सिंबल दिया जा सकता है।
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सोमवार सुबह शिवपाल सिंह यादव ने ट्वीट कर पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन रद्द करने की जानकारी दी और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह चुनाव की तैयारियों में जी जान से जुट जाएं।
अखिलेश भी पीछे हटने को नहीं हैं तैयार
इधर, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। एक जनवरी को विशेष अधिवेशन में पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित होने के साथ ही उन्होंने मुलायम के सबसे करीबी अमर सिंह को पार्टी से बर्खास्त कर दिया तो शिवपाल को भी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया।
अखिलेश ने सोमवार सुबह 11 बजे पार्टी की बैठक बुलाई, जिसके बाद उम्मीद की जा रही है कि शिवपाल के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पार्टी से बर्खास्त किए गए नेताओं की फिर वापसी हो सकती है।
बता दें कि सपा संग्राम की शुरुआत होने पर जब अखिलेश को अध्यक्ष पद से हटाया गया था विरोध में यूथ विंग ने जमकर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में उन्होंने मुलायम और शिवपाल के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।
जिससे उस वक्त सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने युवाजन सभा, लोहियावाहिनी, मुलायम ब्रिगेड और छात्रसभा के अध्यक्षों सहित सात युवा नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में बर्खास्त कर दिया था।
निकाले गए नेताओं में सुनील सिंह यादव (एमएलसी), आनंद भदौरिया (एमएलसी), मो एबाद (प्रदेश अध्यक्ष यूथ ब्रिगेड), बृजेश यादव प्रदेश अध्यक्ष युवजन सभा, संजय लाठर (एमएलसी), गौरव दुबे राष्ट्रीय अध्यक्ष यूथ ब्रिगेड, दिग्विजय सिंह देव प्रदेश अध्यक्ष छात्रसभा शामिल थे।
अखिलेश के फैसले से हैरान रह गए मुलायम
इसके पहले एक जनवरी को सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किए जाने सहित कई फैसले लिए जाने पर मुलायम ने हैरानी जताई थी।
उन्होंने पांच विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने आवास पर बयान दिया था कि समाजवादी पार्टी मेरी है, इसे मैंने बनाया है। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए चौंकाने वाला है कि अखिलेश व रामगोपाल ने इतने बड़े फैसले किए।
अधिवेशन में अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया तो मुलायम को संरक्षक की भूमिका दी गई। शिवपाल सिंह यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। वहीं, अमर सिंह को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया।
राष्ट्रीय अधिवेशन में हुई घोषणाओं पर मुलायम ने भी तीखा पलटवार किया और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे किरनमय नंदा व नरेश अग्रवाल को पार्टी से निकाल दिया और अधिवेशन को अवैध घोषित कर दिया।
इसके लिए जारी किए गए पत्र में कहा गया था कि रविवार को जनेश्वर मिश्र पार्क में बुलाया गया पार्टी का आपातकालीन अधिवेशन असंवैधानिक हैं और इसमे लिए जाने वाले सारे फैसले रद्द किए जाते हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पहले जारी की गई प्रत्याशियों की सूची को अनुमोदित करतें है और बाकी बचे प्रत्याशियों की घोषणा करने का आदेश दिया गया।
पत्र में कहा गया है कि सपा सुप्रीमो मुलायम ने कड़ी मेहनत कर पार्टी को खड़ा किया है। कुछ लोग अपने कुकृत्यों को छुपाने, सीबीआई से बचने व भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ही पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया।
इसके बाद सोमवार को अखिलेश व मुलायम के खेमों के चुनाव आयोग का रुख करने के बाद घमासान कम नहीं होगा बल्कि और बढ़ जाएगा।