जिपं अध्यक्ष चुनाव एक बार फिर साबित करता नजर आ रहा है कि गिनती के वोटों में सांगठनिक कौशल के सामने छत्रपों की मठाधीशी ही कारगर होती है। संगठन की ताकत का डंका पीट रहे दल लगभग हर क्षेत्र के किसी न किसी रसूखदार छत्रप के सामने नतमस्तक की स्थिति में है। गोंडा, सिद्धार्थनगर, जौनपुर, प्रतापगढ़ से लेकर गोरखपुर तक यह देखा जा सकता है। हालात ये हैं कि तमाम छत्रपों ने पार्टियों को रणनीति में इस तरह उलझाया कि कई जिलों में चौंकाऊ व जेबी प्रत्याशी तक सामने आए हैं।
कैसे-कैसे समीकरण: जीत के लिए बसपा से जीते और बागी को अपनाया
- अंबेडकरनगर में भाजपा के दो सदस्य जीते थे। दो बागी जीते, जिन्हें मिला लिया गया। पर, 41 सदस्यों में जीत के लिए जरूरी संख्या का इंतजाम मुश्किल लगा तो बसपा के बागी को कुर्सी थमा दी। अब भाजपा के चार वोटों के साथ साधू वर्मा 11 सीट जीतने वाली सपा के अजीत यादव के सामने मजबूत दावेदार बनकर उभर आए हैं। यहां की लड़ाई में 20 निर्दल और बसपा के सदस्यों की अहम भूमिका रहने वाली है।
- संतकबीरनगर में बसपा के 5 जिला पंचायत सदस्य जीते थे। कृष्ण कुमार चौरसिया भी इनमें शामिल थे। भाजपा ने यहां की 30 सीटों में से 3 पर जीत दर्ज की थी। सपा के बागियों को जोड़ दें तो 12 सदस्य हैं। भाजपा ने यहां अपना अध्यक्ष बनाने के लिए कृष्ण कुमार को अपना प्रत्याशी बना दिया है। अब 14 निर्दल व बसपा के 4 अन्य अहम भूमिका निभाएंगे। सपा ने भी निर्दल जीते बलिराम यादव पर भरोसा किया है।
- गोरखपुर में पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह की पत्नी साधना सिंह भाजपा से हैं तो सपा ने आलोक गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। यहां का समीकरण साधना के पक्ष में फिट बैठता बताया जा रहा है। सिद्धार्थनगर और बस्ती में भी समीकरण सत्ता पक्ष की ओर जाता नजर आ रहा है।
- देवरिया में भाजपा ने जिस-जिस को अध्यक्ष का चेहरा मानकर सदस्य का चुनाव लड़ाया, वे सभी हार गए थे। नतीजा ये हुआ कि पुराने सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश तिवारी को प्रत्याशी बना दिया गया है। सपा ने पूर्व जिलाध्यक्ष की बहू शैलजा यादव को प्रत्याशी बनाया है। यहां सदस्य के हिसाब से सपा, भाजपा पर भारी है। पर, समीकरण भाजपा का सेट होता नजर आ रहा है। वहां के कई सदस्य लखनऊ पहुंच चुके हैं।
पश्चिम में मेरठ में कम सीटों के बावजूद भाजपा अध्यक्ष बनाने की मुकम्मल व्यवस्था कर चुकी है, लेकिन बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर व सहारनपुर में भाजपा को घेरने के लिए गैर बसपा विपक्षी दल सारे मतभेद भुलाकर एकजुट हो गए हैं। कई जगह बसपा के कुछ सदस्य भी विपक्ष के साथ हैं।
अवध में सत्ता के दबदबे की रणनीति तैयार
अवध के जिलों में भी सत्ताधारी दल भाजपा का समीकरण सेट होता जा रहा है। गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, फैजाबाद, बहराइच और अंबेडकरनगर से लेकर अमेठी और सुलतानपुर तक अध्यक्ष की जोर-आजमाइश भाजपा व सपा के बीच है। अन्य कई जिलों की तरह यहां भी निर्दल और बसपा सदस्यों की भूमिका अहम है। मगर सूचना के मुताबिक सत्ताधारी दल ज्यादातर जिलों में जरूरी संख्या बल जुटाने की स्थिति में पहुंच गया है। कई जगह निर्विरोध चुनाव हो सकता है।