इलाहाबाद में पकड़े गए साल्वर गैंग के मुख्य सरगना ओम सहाय ने बताया कि वह इस धंधे में लंबे समय से सक्रिय है। शिक्षक भर्ती के लिए भी उसने तैयारी की थी और बिहार से साल्वर बुलाए थे। प्रदेश के अलग अलग जिलों में आयोजित इस परीक्षा के लिए प्रति साल्वर 50 हजार रुपये में उसने सौदा किया था। ओम सहाय और उसकी पत्नी नीलम सहाय कौशांबी में प्राथमिक विद्यालय में टीचर थे।
दोनों ने ही फर्जी टीईटी के सर्टिफिकेट पर नौकरी हासिल की थी। जांच में दोनों फर्जी पाए गए थे, जिसके दोनों को बर्खास्त कर दिया गया था। उसी के बाद से वह इस धंधे में आया और कई परीक्षाओं में नकल कराने और साल्वर के जरिए कैंडीडेट पास कराने का दावा किया है।
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि पेपर साल्व कराने वाला गैंग अपने कैंडीडेट से बिना नाम का चेक और उनके मूल शैक्षिक प्रमाणपत्र जमा करा लिया गया था। परीक्षा में पास होने के बाद चेक में अंकित धनराशि कैश हो जाने पर मूल शैक्षिक प्रमाण पत्र वापस होने की बात कही गई थी। इस चेक पर ढाई से तीन लाख रुपये अंकित किए गए थे।
फर्जी दस्तावेज के जरिए मुख्य अभ्यर्थी के स्थान पर बैठे साल्वर
अभिषेक सिंह ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए हैं जिस पर नाम पता मुख्य अभ्यर्थी और फोटो साल्वर की लगाई गई थी। साल्वर गैंग ने परीक्षा पास कराने के लिए अभ्यर्थी को दो तरह के आफर दिए थे। एक में साल्वर के माध्यम से और दूसरे में पहले पेपर उपलब्ध कराने के रेट दिए गए थे।
परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी कार्रवाई लखनऊ की टीमों ने की, जिसने साल्वर गैंग के 34 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। लखनऊ में इंदिरानगर में कार्रवाई करते हुए एसटीएफ की टीम ने यह कार्रवाई की। यहां से गिरफ्तार किए गए लोगों में सरगना सतीश कुमार त्रिपाठी के अलावा कई डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एक्सरे टेकिभनशियन और बिचौलिये शामिल हैं।
परीक्षा के दौरान खामियां ही खामियां
प्रदेश के 39 जिलों में आयोजित की गई इस परीक्षा के दौरान खामियां ही खामियां नजर आईं। न तो अभ्यर्थियों की सही से जांच हो रही थी और न ही आईडी और एडमिट कार्ड का मिलान किया जा रहा था। कई सेंटर ऐसे थे जहां सीसीटीवी कैमरे ही नहीं लगे थे। इसे लेकर अभ्यर्थियों में काफी रोष भी देखने को मिला।
समय होता तो और होती गिरफ्तारियां
एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि परीक्षा के दौरान हर केंद्र पर कोई न कोई खामी थी। परीक्षा सिर्फ दो घंटे की थी और एसटीएफ के पास मैन पावर और संसाधन दोनों की कमी थी। ऐसे में कम समय के चलते इतनी कार्रवाई हुई। उक्त अधिकारी का मानना है कि समय होता तो या परीक्षा को दो पारियों में किया गया होता तो और अधिक गिरफ्तारियां होतीं। परीक्षा प्रदेश के 39 जिलों में थी जबकि एसटीएफ की पहुंच 10 से 15 जिलों तक ही हो पाई।
चार दिन पहले एसटीएफ को दी गई थी जानकारी
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि इस परीक्षा के बारे में एसटीएफ को चार दिन पहले जानकारी दी गई। कम समय में भी एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए इतने लोगों को गिरफ्तार किया। यह जानकारी और पहले दी गई होती तो शायद एसटीएफ और बेहतर तरीके से तैयारी कर कार्रवाई करती।