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नगरीय निकायों व ग्रामीण पंचायतों में कई सुधार होंगे लागू, पंचम वित्त आयोग पर सरकार की मुहर से रास्ता साफ

Mon, 24 Aug 2020 07:22 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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पंचम राज्य वित्त आयोग की कई महत्वपूर्ण संस्तुतियों को स्वीकार किए जाने से त्रिस्तरीय नगरीय निकायों व ग्रामीण पंचायतों में कई सुधारों को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने नगर विकास व पंचायतीराज विभाग को सुधारों को लागू करने की कार्यवाही का निर्देश दे दिया है।

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केंद्र सरकार ने भू-गृह के गैर आवासीय प्रयोग की अनुमति देने के लिए मॉडल म्युनिसिपल लॉ के अंतर्गत 337 मद चिह्नित किए हैं। राज्य सरकार ने इसके लिए 115 मदें चिह्नित की हैं लेकिन आगे चलकर इसे मात्र 39 मदों में सीमित कर दिया। आयोग ने इस सूची को संशोधित कर अनुमति के मदों का दायरा बढ़ाने की सिफारिश की। इसी तरह ग्रामीण पंचायतों में विभव व संपत्ति कर की दरों को समग्र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर पुनरीक्षित करने की संस्तुति की है।

इसी आधार पर क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत अधिनियम की धारा, 121 (ख) में संशोधन कर, कर योग्य आय सीमा के लिए तय राशि 12,000 रुपये वार्षिक को बढ़ाने को कहा है। इससे छोटे व्यवसायियों को कर से राहत मिलेगी। सरकार ने इन दोनों ही संस्तुतियों को स्वीकार कर लिया है। इससे ग्रामीण व स्थानीय निकायों की आय बढ़ सकेगी।
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ग्रामीण क्षेत्र के दुकानदारों की मुश्किल होगी आसान
ग्रामीण क्षेत्र में लगने वाले बाजारों व दुकानों को नियमित करने के लिए राज्य सरकार स्पष्ट निर्देश जारी करेगी। इससे इन व्यवसायियों को अपना कार्य वैधानिक तरीके से करने में आसानी होगी तथा लाइसेंस शुल्क जमा करने में मुश्किलों से राहत मिलेगी।

लाइसेंस शुल्क वसूली में आएगी पारदर्शिता : प्रत्येक जिला पंचायत जिले के अंदर आने वाले बाजारों व स्थलों का ब्योरा तैयार कर अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगी। इसमें प्रत्येक दुकान के प्रकार का उल्लेख करते हुए उन पर लगने वाले लाइसेंस शुल्क का उल्लेख किया जाएगा। इस वसूली का जिला पंचायत नियमित समीक्षा करेगी।

हाटपैठ-बाजार पर शुल्क लगाएंगी ग्राम पंचायतें

कई ग्राम पंचायतें ग्रामसभा की जमीन पर लगने वाली हाट-पैठ व पशु बाजारों में शासन या अपनी आय से दुकानदारों के लिए पक्के शेड, पेयजल सुविधा, शौचालय व खड़ंजा आदि बनाने के साथ ही इनका रख-रखाव भी करती हैं। पंचायतें प्रति दुकान शुल्क लगाकर अथवा नीलामी की व्यवस्था कर सकेंगी। इससे हाट-पैठ व पशु बाजार पंचायतों की आय का प्रमुख स्रोत बन सकेंगी। पंचायतों से होने वाली आय को ग्राम निधि में जमा करने की व्यवस्था भी की जाएगी।

पंचायत क्षेत्र में विजुअल प्रचार पर लगेगा टैक्स
प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में दृश्य प्रचार माध्यमों पर शुल्क लगाएगी। इसके लिए नियमावली बनाई जाएगी। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा संबंधित पंचायतों को तय शुल्क का भुगतान कर प्रचार की स्वीकृति ली जाएगी। दरें प्रचार माध्यम व उसके आकार के आधार पर तय होंगी।

करारोपण अधिकार में अभी छूट नहीं, ऑनलाइन जमा कराने होंगे कर
आयोग ने नगरीय निकायों को ऐच्छिक करों व करेतर राजस्व में वृद्धि के लिए करारोपण का पूर्ण अधिकार देने की संस्तुति की थी। सरकार ने पूर्ण अधिकार देने पर सहमति नहीं दी है। हालांकि राज्य सरकार की सहमति से करारोपण व संशोधन किया जा सकेगा। इसी तरह आयोग ने कर प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए करों को एक ही वेबसाइट पर ऑनलाइन जमा करने की व्यवस्था करने की संस्तुति की है।
सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा कुशल प्रबंधन, कार्यात्मक दक्षता व वित्तीय अनुशासन लागू किया जाएगा। अधिक राजस्व अर्जित करने के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार भी शुरू किया जाएगा।

पानी के मीटर लगेंगे, कैशलेस व्यवस्था होगी लागू

नगरीय निकाय अपने क्षेत्र में पानी के मीटर लगेंगे। इससे राजस्व में वृद्धि होगी और जल संसाधन का दुरुपयोग रुकेगा। इसके अलावा समस्त प्रकार के भुगतान कैशलेस किए जाएंगे। ठेकेदारों को किए जाने वाले भुगतान सहित कार्मिकों को किया जाने वाला समस्त नकद भुगतान बंद किया जाएगा।

निकाय क्षेत्र में समस्त निर्माण कार्यों की कंप्यूटरीकृत प्रणाली विकसित की जाएगी। इसमें निर्माण कार्यों की जियो टैगिंग कराई जाएगी तथा ट्विटर व अन्य सोशल मीडिया प्रणाली पर इसे साझा किया जाएगा। इससे विकास प्राधिकरणों, अन्य संस्थाओं तथा सांसद-विधायक निधि से होने वाले कार्यों का भी पर्यवेक्षण हो सकेगा। समस्त निकायों को ऑडिट की कार्यवाही समय से पूरी करानी होगी।

भूगर्भ जल संरक्षण के क्रियान्वयन की योजना पर मुहर
सरकार ने दो या दो से अधिक विकास खंडों से संबंधित भू-गर्भ जल संरक्षण संबंधी ऐसी योजना बनाने का अधिकार जिला पंचायतों को, दो या दो से अधिक गांवों की योजना बनाने का काम क्षेत्र पंचायतों को व मात्र एक ग्राम पंचायत से संबंधित योजना का काम ग्राम पंचायतों से कराने का फैसला किया है। इन योजनाओं के निर्माण व क्रियान्वयन में वाटर रीचार्जिंग में दक्ष विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

क्षेत्र पंचायतें रिसोर्स सेंटर बनाएंगी

क्षेत्र पंचायतों में रिसोर्स सेंटर की स्थापना की जाएगी। वहां सरकार, पंचायत व जनता क बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान, संवाद, पंचायत प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण व ई-पंचायत का कार्य होगा। ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय व वाचनालय की भी व्यवस्था होगी। ग्राम पंचायत भवन व क्षेत्र पंचायत रिसोर्स सेंटर में अभिलेखागार कक्ष बनाए जाएंगे। जिला स्तर पर जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय अथवा जिला पंचायत कार्यालय भवन के किसी कक्ष में स्थापित किया जाएगा।

कर्मचारी घटाएं, आउटसोर्सिंग और पीपीपी को दें बढ़ावा
आयोग ने नगरीय निकायों को आय बढ़ाने के लिए नए स्रोतों को चिह्नित करने को कहा है। इसके अलावा खर्च को नियंत्रित करने के लिए अनावश्यक पदों को समाप्त करने, ज्यादा से ज्यादा काम आउटसोर्स से कराने व नागरिक सुविधाएं दिलाने में पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने को कहा है। सरकार ने इस सुझाव को भी स्वीकार कर लिया है।

ग्रामीण पंचायतें कंप्यूटराइजेशन को देंगी तवज्जो
जिला पंचायतों को कंप्यूटराइजेशन, डिजिटाइजेशन व ई-गवर्नेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करनी है। इसके लिए सरकार राशि उपलब्ध कराएगी। ग्राम पंचायतों को जन्म-मृत्यु पंजीकरण व परिवार रजिस्टर का डिजिटाइजेशन भी कराना होगा।
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20 हजार ग्राम पंचायतों में बनेंगे पंचायत भवन

सरकार ने ग्राम पंचायत भवन विहीन 20 हजार ग्राम पंचायतों को पंचायत घर बनाने के संबंध में निर्णय लेने को कहा है। ग्रामीण क्षेत्र में अंत्येष्टि स्थलों में आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिन ग्राम पंचायतों में सीसी रोड व केसी ड्रेन की जरूरत है, वहां इस काम के लिए धनराशि ग्राम पंचायतों को ही दी जाएगी। ग्राम पंचायतें ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस का भी आयोजन शुरू करेगी।
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