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अल्पसंख्यकों के लिए सपा ने फेंका नया पासा

Sat, 12 Oct 2013 10:45 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ
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प्रदेश सरकार अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए एक और पहल करने जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश के 75 और मदरसों को अनुदान सूची में शामिल करने की तैयारी है।
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सूची में शामिल होने पर शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन का खर्च सरकार उठाती है। साथ ही कई और सुविधाओं का भी लाभ मिलता है।

पढ़िए: यूपी में 118 मदरसे फर्जी

सरकार की इस कवायद के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों के मदरसा संचालक अपने-अपने मदरसे इसमें शामिल करवाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाने में जुट गए हैं।

इनमें कई ऐसे मदरसे हैं जो वर्ष 2010 में भी अनुदान के लिए आवेदन कर चुके हैं। लेकिन उस समय मानकों पर ये खरे नहीं पाए गए थे। अभी प्रदेश में 459 मदरसे ऐसे हैं जिन्हें सरकार अनुदान दे रही है।

चालू वित्तीय वर्ष में 75 मदरसों को शामिल किया जाएगा। यही नहीं नए वित्तीय वर्ष में भी लगभग इतने ही और मदरसों को सूची में शामिल करने का भी निर्णय किया जा चुका है।
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सरकार के निर्देश के बाद निदेशालय स्तर पर बनी समिति मदरसों की जांच में जुट गई है। निदेशालय की रिपोर्ट आने के बाद सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण स्तर पर बनी अनुदान समिति इन मदरसों को अनुदान सूची में शामिल करने की संस्तुति करेगी।
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37-38 करोड़ रुपये का पड़ेगा भार
अनुदान मिलने के बाद मदरसों को 12 शिक्षकों जिसमें आलिया के लिए चार, फौकानिया के लिए तीन व तहतानिया के लिए पांच पद स्वीकृत हो जाते हैं।

इनके अलावा प्रधानाचार्य व दो कर्मचारियों के पद भी बढ़ जाते हैं। इससे सरकार पर प्रति मदरसा करीब 50 लाख रुपये सालाना का बोझ आता है।

75 मदरसों को अनुदानित करने से सरकार पर 37-38 करोड़ रुपये का भार आने की उम्मीद की जा रही है।

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