भारत-नेपाल सीमा पर नो मेंस लैंड के निकट नेपाल द्वारा निर्माणाधीन तटबंध
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नेपाल व भारत के बीच भूभाग को लेकर पहले ही तनाव है। इसी बीच नेपाल सिकटा परियोजना के तहत बघौड़ा तक एक नहर का निर्माण कर रहा है। जबकि श्रावस्ती के सिधाई में एक नया तटबंध भी बनाया जा रहा है। इसके जरिए बाढ़ के समय राप्ती नदी की दिशा भारत की ओर मोड़ने की कोशिश है। यही नहीं सिंचाई जरूरत के समय सिकटा से सीधे राप्ती नदी का पानी नहर में मोड़ दिया जाएगा। इससे नेपाल के साथ भविष्य में नया जल विवाद पैदा हो सकता है। चीन का प्रभाव बढ़ने के बाद नेपाल बार-बार नए-नए विवादों को जन्म देने की कोशिश में लगा हुआ है। इसमें कुछ ऐसे भी काम हैं जिनके दूरगामी नतीजे सामने आएंगे। राप्ती नदी पर बन रही नहर परियोजना भविष्य में नए जल विवाद को जन्म दे सकती है।
नेपाल राप्ती नदी पर स्थित सिकटा पन विद्युत परियोजना से एक डबल लेन नहर का निर्माण श्रावस्ती के बघौड़ा तक कर रहा है। नेपाल का कहना है कि यह नहर महज नेपाल के असिंचित क्षेत्र को सिंचित करने के लिए है। लेकिन सीमावर्ती गांव में बसे किसान इसे दूरगामी परिणाम के रूप में देख रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्र जमुनहा के किसान श्यामता प्रसाद वर्मा, जगतपाल सिंह, बालक राम वर्मा, किशोरी लाल विश्वकर्मा का कहना है कि यह नहर भविष्य के भारत-नेपाल संबंध के लिए एक विवाद बन कर उभरेगा। इसका कारण है कि नेपाल पहले से ही भारतीय क्षेत्र बहराइच के संतलिया व श्रावस्ती के कलकलवा तटबंध के सामने ही पिपरहवा, खड़ैचा, अमृतपुरवा, तटबंध का निर्माण कर रहा है।
इस तटबंध के साथ-साथ नेपाल कई स्टड बना कर बाढ़ के समय में राप्ती नदी की धारा को भारतीय क्षेत्र श्रावस्ती की ओर मोड़ने का प्रयत्न कर रहा है। वहीं सिंचाई के समय सीधे सिकटा से पानी नहर में मोड़कर भारतीय क्षेत्र में आने वाली राप्ती नदी को सुखा दिया जाएगा। इससे भारतीय क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। इसी को लेकर भविष्य में दोनों देशों के बीच जल विवाद उत्पन्न हो सकता है।