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भारत-नेपाल के बीच जल विवाद की आशंका, सिकटा परियोजना से बघौड़ा तक नेपाल बना रहा नहर

Wed, 24 Feb 2021 07:01 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रावस्ती
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भारत-नेपाल सीमा पर नो मेंस लैंड के निकट नेपाल द्वारा निर्माणाधीन तटबंध - फोटो : अमर उजाला
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नेपाल व भारत के बीच भूभाग को लेकर पहले ही तनाव है। इसी बीच नेपाल सिकटा परियोजना के तहत बघौड़ा तक एक नहर का निर्माण कर रहा है। जबकि श्रावस्ती के सिधाई में  एक नया तटबंध भी बनाया जा रहा है। इसके जरिए बाढ़ के समय राप्ती नदी की दिशा भारत की ओर मोड़ने की कोशिश है। यही नहीं सिंचाई जरूरत के समय सिकटा से सीधे राप्ती नदी का पानी नहर में मोड़ दिया जाएगा। इससे नेपाल के साथ भविष्य में नया जल विवाद पैदा हो सकता है। चीन का प्रभाव बढ़ने के बाद नेपाल बार-बार नए-नए विवादों को जन्म देने की कोशिश में लगा हुआ है। इसमें कुछ ऐसे भी काम हैं जिनके दूरगामी नतीजे सामने आएंगे। राप्ती नदी पर बन रही नहर परियोजना भविष्य में नए जल विवाद को जन्म दे सकती है।
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नेपाल राप्ती नदी पर स्थित सिकटा पन विद्युत परियोजना से एक डबल लेन नहर का निर्माण श्रावस्ती के बघौड़ा तक कर रहा है। नेपाल का कहना है कि यह नहर महज नेपाल के असिंचित क्षेत्र को सिंचित करने के लिए है। लेकिन सीमावर्ती गांव में बसे किसान इसे दूरगामी परिणाम के रूप में देख रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्र जमुनहा के किसान श्यामता प्रसाद वर्मा, जगतपाल सिंह, बालक राम वर्मा, किशोरी लाल विश्वकर्मा का कहना है कि यह नहर भविष्य के भारत-नेपाल संबंध के लिए एक विवाद बन कर उभरेगा। इसका कारण है कि नेपाल पहले से ही भारतीय क्षेत्र बहराइच के संतलिया व श्रावस्ती के कलकलवा तटबंध के सामने ही पिपरहवा, खड़ैचा, अमृतपुरवा, तटबंध का निर्माण कर रहा है।

इस तटबंध के साथ-साथ नेपाल कई स्टड बना कर बाढ़ के समय में राप्ती नदी की धारा को भारतीय क्षेत्र श्रावस्ती की ओर मोड़ने का प्रयत्न कर रहा है। वहीं सिंचाई के समय सीधे सिकटा से पानी नहर में मोड़कर भारतीय क्षेत्र में आने वाली राप्ती नदी को सुखा दिया जाएगा। इससे भारतीय क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। इसी को लेकर भविष्य में दोनों देशों के बीच जल विवाद उत्पन्न हो सकता है।
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राप्ती मुख्य नहर भी राप्ती के जल पर निर्भर

राप्ती नदी में आने वाली बाढ़ को संतुलित करने व बाढ़ के पानी को सिंचाई के लिए उपयोग करने के लिए भारत सरयू मुख्य नहर का निर्माण श्रावस्ती में हो रहा है। इस नहर में जल का स्रोत राप्ती लिंक चैनल के साथ ही राप्ती नदी की मुख्य धाराएं हैं। यदि नेपाल ने राप्ती के पानी को नहरों में मोड़ दिया तो इस नहर में राप्ती का पानी नहीं आ पाएगा। इसके चलते केवल लिंक चैनल व नालों के भरोसे यह नहर किसानों के खेतों की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाएगी।

दूरगामी दुष्परिणाम होगा
कहा जा रहा है कि नेपाल में राप्ती नदी के तट पर बन रहे तटबंध व सिकटा परियोजना से बघौड़ा तक निकल रही नहर के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि जब बरसात का समय आएगा तो राप्ती नदी में बाढ़ को देखते हुए पानी छोड़ा जाएगा। ऐसी स्थिति में यह तटबंध डायवर्जन का काम करके राप्ती नदी की दिशा पुन: भारत की ओर मोड़ देगी। ऐसे में भारतीय क्षेत्र के करीब बारह गांव से जुड़े भू क्षेत्र कटान ग्रस्त हो सकते हैं। वहीं गर्मी व अन्य मौसम में सिंचाई का समय सिकटा परियोजना से ही राप्ती नदी की जलधारा को इस नहर में मोड़ दिया जाएगा। इससे नेपाली सीमावर्ती क्षेत्र के गांव तो सिंचित हो जाएंगे। लेकिन भारतीय क्षेत्र की भूमि सूखी रह जाएगी। भविष्य में इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच एक नया विवाद जन्म ले सकता है।

यहां बन रही नहर
नेपाल स्थित सिकटा पन विद्युत परियोजना राप्ती नदी पर ही स्थिति है। यहां राप्ती नदी का पानी रोक कर नेपाल चीन के माध्यम से विद्युत परियोजना पर काम कर रहा है। यहीं से नहर निकाल कर श्रावस्ती के बघौड़ा के समानांतर नहर आएगी। यह नहर लगभग 16 से 20 मीटर चौड़ी है। जिसे बीच से दो भागों में बांटा गया है।

तटबंध व नहर मिल कर राप्ती नदी पर कर लेगी एकाधिकार
राप्ती नदी को डायवर्ट करने के लिए बनाया जा रहा पिपरहवा खड़ैचा अमृतपुरवा तटबंध व सिकटा बघौड़ा नहर पूरी तरह राप्ती नदी को कंट्रोल कर रही है। बाढ़ के समय में जहां पानी का डायवर्जन होगा। वहीं सिंचाई के समय में यह नहरों की ओर मोड़ दी जाएगी।  

नेपाल में बन रही इस नहर व तटबंध के बारे में अभी जानकारी नहीं है। संबंधित सिंचाई खंड को निर्देशित कर रहा हूं कि वह मौके पर जाकर स्थिति को देखें।
एसके प्रियदर्शी, अधीक्षण अभियंता सिंचाई
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