इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती होने वाले मरीजों में शुगर लेवल सामान्य होने के बाद भी शुगर जनित बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। इन मरीजों में शरीर से निकले वाला तत्व का लेवल कम और अधिक (ग्लाइसिन गैप) हो जाता है। ऐसे में शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतनी होती है।
इतना ही नहीं आईसीयू से बाहर आने के बाद शुगर की नियमित निगरानी रखनी पड़ती है। यह खुलासा हुआ है केजीएमयू के शोध में। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु, डॉ. अरविंद मिश्रा, डॉ. मोनिका कलनी ने आईसीयू के मरीजों में अचानक शुगर बढ़ने की वजह की पड़ताल की।
करीब 150 मरीजों में किए गए शोध के दौरान देखा गया कि जिन मरीजों को कभी भी शुगर नहीं रही है, उन्हें भी आईसीयू में आने के बाद शुुगर की समस्या होती है। इसकी मूल वजह है ग्लाइसिन गैप में उतार-चढ़ाव। इसका बढ़ना और घटना दोनों खतरनाक होता है।
इनमें कई बार हाइपोग्लाइसिमिया यानी लो ब्लड शुगर का भी खतरा रहता है। ग्लाइसिन के प्रभावित होने का असर सीधे तौर पर दिमाग के काम करने की क्षमता पर भी पड़ता है। इससे दौरे पड़ने, स्ट्रोक या कोमा जैसी स्थिति भी हो सकती है। यहां तक कि हाइपोग्लाइसीमिया की वजह से जान भी जा सकती है।
डायबिटीज रोगियों किसी तरह की आपात स्थिति में अस्पताल जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा ले सकते हैं। उन्हें कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। पूरे प्रदेश में जीवीकेईएमआरआई की ओर से इमरजेंसी सेवा के तौर पर 108 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। किसी भी मधुमेह रोगी के अचानक गिरने, बेहोश होने की स्थिति में अस्पताल जाने के लिए 108 नंबर पर डायल करके एंबुलेंस को बुलाया जा सकता है।