यह पूरी गड़बड़ी आधार कार्डों के जरिये पकड़ में आई है। विभाग ने सॉफ्टवेयर से सभी राशनकार्डों पर दर्ज आधार नंबर से उन किसानों का मिलान किया, जिन्होंने सरकारी क्रय केंद्रों पर धान व गेहूं बेचे हैं। जांच में ऐसे 66 हजार आधार नंबर मिले जिनके राशनकार्ड बने हैं और उन्होंने तीन लाख रुपये से ज्यादा का अनाज बेचा है। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें आठ से दस लाख रुपये तक का अनाज बेचा गया है।
...कहीं मुफ्त लेकर बेच तो नहीं दिया
जिलाधिकारियों को भेजी गई जांच का मुख्य बिंदु यह तो है ही कि अपात्रों को कैसे राशन वितरण किया गया। साथ ही यह भी है कि कहीं मुफ्त का राशन लेकर क्रय केंद्रों पर तो नहीं पर बेच दिया। या फिर राशन माफिया ने सेटिंग कर इस तरह का खेल न हो रहा हो।
प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद वीना कुमारी मीना का कहना है कि मामले में सभी जिलाधिकारियों को गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। 15 दिन में पूरी रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद इन पर कार्रवाई होगी।