कृषि रक्षा विभाग अपर निदेशक त्रिपुरारी प्रसाद चौधरी का कहना है, 'रसायनों के अत्यधिक प्रयोग रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। काफी कीटनाशक ऐसे हैं, जो विकल्प के तौर पर मौजूद हैं। दुकानदारों के पास इसकी पूरी जानकारी है। किसान उनका ही प्रयोग करें। वैसे किसान यदि जैविक आधार पर ही फसलों का उपचार करें तो ज्यादा सही है। रसायनों का सबसे ज्यादा असर बासमती में आ रहा है।'
विशेषज्ञ बोले- समेकित जीवनाशी प्रबंधन है उपाय
डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेकनोलॉजी सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि मोदीपुरम के विभागाध्यक्ष डॉ. आरएस सेंगर का कहना है, ‘समेकित नाशी जीव प्रबंधन से पत्ती छेदक, तना छेदक आदि को नियंत्रित किया जा सकता है। ये जैविक उपाय हैं। फेरोमोन ट्रैप इसका उपाय है। एक एकड़ में दो ट्रैप लगा सकते हैं। इसके अलावा ट्राई कार्ड, नीम ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस समय अधिकतर फसल पककर तैयार है। ऐसे में रसायन की जरूरत नहीं है।’
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यह किसानों के खिलाफ सजिश : टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है, ‘कभी कटीले तारों पर प्रतिबंध, कभी ट्रैक्टर ट्रॉली पर तो कभी कीटनाशकों के प्रयोग पर। यह किसानों के खिलाफ साजिश हो रही है। वे खेती छोड़ें तो उनकी जमीन कब्जाई जाए। समय से प्रतिबंध लगाते और उसका विकल्प देते। ऐसी बातें नहीं मानी जाएंगी जो किसान हित में नहीं होंगी।’