औद्योगिक विकास प्राधिकरण पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए अधिगृहीत जमीन से हटकर अधिक रकबे की भूमि पर जबरन निर्माण करवा रहा है। यह आरोप लगाते हुए नगराम के किसानों ने रविवार को जमकर हंगामा किया। किसानों ने बताया कि इस बाबत मुख्यमंत्री, डीएम, एसडीएम मोहनलालगंज और औद्योगिक विकास प्राधिकरण के परियोजना निदेशक को पत्र भेजकर शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है।
चेतावनी दी कि सप्ताहभर में अतिरिक्त कब्जा भूमि का मुआवजा न दिया गया तो आमरण अनशन करेंगे। लखनऊ से बलिया तक बनने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे तहसील मोहनलालगंज के अंतर्गत आदमपुर नौबस्ता गांव के पास से निकल रहा है। आदमपुर के बड़ेहा निवासी रामदत्त वर्मा, शिव सिंह, शिवजीत, सदानंद, उमेश कुमार, जनकदुलारी, सुंदारा, मंगल, रामफेर, भोला का पुरवा निवासी श्याम लाल, धर्मराज, रामराज, कमलेश कुमार, अर्जुन, और शिवनंदन समेत कई किसानों ने अपना दर्द बयां किया।
बताया कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए सालभर पहले जमीनों का अधिग्रहण कर रजिस्ट्री बैनामा यूपीडा के पक्ष में करवाया गया था। लेखपाल व राजस्व निरीक्षक सहित तहसीलदार की मौजूदगी में अधिगृहीत भूमि की पैमाइश कर औद्योगिक विकास प्राधिकरण को कब्जा दे दिया गया। अब कार्यदायी संस्था प्रस्तावित भूमि से हटकर शेष बची जमीन पर निर्माण करवा रही है।
भूमिहीन हो जाएंगे किसान
किसान रामदत्त के अनुसार उनकी जमीन गाटा संख्या-934 में से 0.0502 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था जबकि संस्था द्वारा प्रस्तावित स्थल से उत्तर की तरफ हटकर अब 0.0950 हेक्टेयर जमीन पर जबरदस्ती निर्माण किया जा रहा है। इसमें उनका ट्यूबवेल व बोरिंग भी की जा रही है।
किसान शिवसिंह की गाटा संख्या 933, धर्मराज संतराम की गाटा संख्या 951, गुड्डी देवी की गाटा संख्या 863, राजकुमार रामसेवक की गाटा संख्या 873, जनक दुलारी की गाटा संख्या 837, अर्जुन की गाटा संख्या 934, शिवजीत की गाटा संख्या 933 पर अधिगृहीत से अधिक जमीन पर निर्माण से किसान भूमिहीन हो जाएंगे। ऐसे में परिवार के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। इसके चलते किसानों ने मौके पर हंगामा कर मूलरूप से अधिगृहीत भूमि की पैमाइश कर निर्माण कराये जाने व जबरन कब्जा की जा रही भूमि का मुआवजा देने की मांग की है।
किसी के साथ नहीं होने दिया जाएगा अन्याय
डीएम अभिषेक प्रकाश ने बताया कि अधिकृत जमीन को ही पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के निर्माण में प्रयोग में लाया जाएगा। अधिग्रहीत जमीन से ज्यादा जमीन लेने की शिकायत की एसडीएम स्तर से जांच कराने के बाद ही कोई कार्रवाई तय होगी। काश्तकारों के हित के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।