Fastag scam in UP: अब एसटीएफ डीवीआर और सर्वर से पुराना डाटा रिकवर कराने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे आशंका है कि सुबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई हो सकती है।
फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों से फास्टैग बनवाकर टोल पार करने के मामले में जांच में बड़ा राजस्व नुकसान सामने आया है। अब तक चिन्हित 142 वाहनों ने पांच करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की चपत लगाई है। यह शुरुआती आकलन है। जांच पूरी होने के बाद नुकसान की रकम और भी बढ़ सकती है।
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आरटीओ ने तीन अप्रैल 2026 को सरोजनीनगर थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों से फास्टैग बनवाकर टोल पार करने की शिकायत के बाद विवेचना एसटीएफ को सौंपी गई। एसटीएफ ने पांच आरोपी गिरफ्तार किए थे। बीते मंगलवार को एसटीएफ ने टोल प्लाजा पर छापा मारकर डीवीआर, सर्वर और दस्तावेज कब्जे में लिए।
अब एसटीएफ डीवीआर और सर्वर से पुराना डाटा रिकवर कराने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे आशंका है कि सुबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई हो सकती है। फुटेज और सर्वर डाटा मिलने के बाद यह स्पष्ट होगा कि फर्जी नंबर वाले वाहन कब-कब और कितनी बार टोल से गुजरे।