एनआईसी की स्क्रूटनी में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में बड़े घपले का खुलासा हुआ है। जिलों से अग्रसारित किए गए 26 लाख से ज्यादा आवेदन फर्जी मिले हैं।
सबसे ज्यादा गड़बड़ी इंटरमीडिएट के अंकपत्रों और पिछले साल के रिजल्ट की जांच में मिली। चालू सत्र में इस योजना के लिए महज 13.25 लाख छात्र ही पात्र मिले।
समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई के लिए आए आवेदन पत्रों की राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से जांच कराई। छात्रों के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकपत्र, पिछले साल के रिजल्ट की स्थिति और आय व जाति प्रमाणपत्रों की स्क्रूटनी की गई।
इसमें लाखों छात्र ऐसे मिले, जिन्होंने इंटरमीडिएट का जो अंकपत्र लगाया था, वो यूपी बोर्ड के रिकॉर्ड में किसी और छात्र के नाम जारी निकला। हाईस्कूल के अंकपत्रों में भी गड़बड़ियां निकलीं। इसी तरह छात्रों के पिछले साल के रिजल्ट की विभिन्न विश्वविद्यालयों की ओर से उपलब्ध कराए गए डाटा के आधार पर जांच की गई।
आय व जाति प्रमाण पत्र भी फर्जी
पाया गया कि भारी तादाद में छात्रों ने पिछले साल दी गई परीक्षा में खुद को पास दिखाया है, मगर हकीकत में वे फेल हुए हैं या उन्होंने परीक्षा ही नहीं दी।
आय और जाति प्रमाणपत्र भी फर्जी मिले। इन सब वजहों से 39.41 लाख छात्रों में से 26.16 लाख छात्रों को योजना से बाहर कर दिया गया है।
प्रमुख सचिव, समाज कल्याण सुनील कुमार ने बताया कि पूरा डाटा जिलास्तरीय अधिकारियों के यूजर एकाउंट में भेज दिया गया है।
यहां बता दें कि नियमावली में पात्र और अपात्र पाए गए छात्रों का डाटा जिलास्तरीय अधिकारियों के डिजिटल साइन से ही लॉक करने का प्रावधान किया गया है।
-------------------जिलों से अग्रसारित छात्र--पात्र पाए गए छात्र
कक्षा 11-12--6.04 लाख--3.30 लाख
संस्थान स्तर पर--33.37 लाख--9.95 लाख
कुल--39.41 लाख--13.25 लाख
तीन हजार संस्थानों ने नहीं बताया किससे हैं संबद्ध
स्क्रूटनी के दौरान तीन हजार संस्थान ऐसे मिले, जिन्होंने यह नहीं बताया था कि वे किस विश्वविद्यालय या परीक्षा नियामक प्राधिकारी से संबद्ध हैं। इनके करीब 3.82 लाख विद्यार्थियों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है।
प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने बताया कि इनके बारे में निर्णय लेने के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों को दो जनवरी तक का वक्त दिया गया है।
उन्हें या तो यह बताना होगा कि ये संस्थान किस विवि या परीक्षा नियामक प्राधिकारी से संबद्ध हैं या फिर उनके छात्रों को योजना के दायरे से बाहर करना होगा।
प्रमुख सचिव ने बताया कि इनमें से जितने भी संस्थान संबद्ध मिले, उनके छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई की जाएगी।
नौवीं और दसवीं कक्षा में महज 87,894 बच्चे मिले पात्र
कक्षा 9 और 10 में 4 लाख 63 हजार 974 विद्यार्थियों के आवेदन पत्र जिलास्तर से अग्रसारित किए गए थे। यूपी बोर्ड में रजिस्ट्रेशन के आधार पर इन आवेदनों की जांच की गई तो 98 हजार 520 विद्यार्थियों के आवेदन ही सही पाए गए।
यानी यहां भी पंजीकरण किसी और नाम से था, जबकि आवेदन किसी और के नाम से किया गया था।
इसके अलावा 10,626 आवेदन बैंक एकाउंट गलत पाए जाने के कारण संदिग्ध ठहराए गए। इस तरह 87,894 छात्र ही पात्र पाए गए, जिन्हें छात्रवृत्ति योजना का लाभ मिल सकेगा।