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भर्ती में खेल: फर्जी डॉर्क रूम सहायकों ने छोड़ा अस्पताल, महानिदेशालय से सीएमओ ऑफिस तक की मिलीभगत का अंदेशा

Tue, 26 May 2026 10:44 AM IST
Bhupendra Singh चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी में स्वास्थ्य विभाग में भर्ती में भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद फर्जी डॉर्क रूम सहायकों ने अस्पताल छोड़ दिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। महानिदेशालय से लेकर सीएमओ ऑफिस तक की मिलीभगत का अंदेशा है। एक्सरे टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन की तर्ज पर ही डॉर्क रूम सहायक भर्ती में फर्जीवाड़ा हुआ है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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demo - फोटो : संवाद
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विस्तार
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यूपी में स्वास्थ्य विभाग में डॉर्क रूम सहायक की भर्ती में फर्जीवाड़ा एक्सरे टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन भर्ती की तर्ज पर ही किया गया है। इसमें भी महानिदेशालय से लेकर संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय तक की भूमिका मानी जा रही है। खबर प्रकाशित होने के बाद तमाम फर्जी डॉर्क रूम सहायक सोमवार दोपहर बाद अस्पताल से गायब हो गए हैं। विभाग ने भी जांच शुरू कर दी है।

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स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2007 में लैब टेक्नीशियन, 2008 और 2016 में एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती में भ्रष्टाचार हुआ था। इसमें भी एक चयनित के नाम पर चार से पांच लोगों को नियुक्ति पत्र जारी हुई था। इन सभी ने नौकरी हासिल कर ली। मुख्यमंत्री के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई और पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

भर्तियों में फर्जीवाड़ा करने वाला एक ही गैंग

जांच शुरू होते ही फर्जी नौकरी हासिल करने वाले गायब हो गए। एक्सरे टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन की तर्ज पर ही डॉर्क रूम सहायक भर्ती में भी फर्जीवाड़ा हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन सभी भर्तियों में फर्जीवाड़ा करने वाले एक ही गैंग हैं। यह गैंग महानिदेशालय से लेकर संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय तक सक्रिय रहा।

फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कराने से लेकर कार्यभार ग्रहण कराने तक में भूमिका निभाई। इतना ही नहीं कार्यभार ग्रहण करने के बाद सीएमओ कार्यालय से महानिदेशालय को भेजा जाने वाला प्रमाण पत्र भी रोकवा दिया। उसका सत्यापन नहीं होने पाया। क्योंकि सत्यापन होते ही पूरे मामले की पोल खुलनी तय थी।

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दोपहर बाद अस्पताल से गायब हुए कई डॉर्क रूम सहायक

अमर उजाला ने विभिन्न जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फर्जी नियुक्ति पत्र से तैनात होने वाले डॉर्क रूम सहायकों के बारे में पड़ताल की। इस दौरान पता चला कि आजमगढ़, अमेठी, इटावा, हरदोई सहित विभिन्न जिलों में कार्यरत डॉर्क रूम सहायक सोमवार दोपहर बाद अचानक गायब हो गए हैं। कई जिलों में सुबह बिना अवकाश लिए ही वे गायब हो गए।

अमर उजाला कार्यालय से कई डॉर्क रूम सहायकों के मोबाइल नंबर पर कॉल की गई तो वे जवाब देने से बचते रहे और अगले ही पल मोबाइल नंबर स्विच ऑफ कर दिया। जबकि प्रकाशित खबर में जिन चयनितों का नाम हैं, उसमें से कई लोग अस्पताल में उपस्थित रहे। बातचीत में दावा किया कि उनके नाम चयनित सूची में हैं। उन्होंने बकायदे सूची में अपना क्रमांक भी बताया। साथ ही पूरे मामले का खुलासा करने के लिए अमर उजाला का आभार भी जताया।

लखनऊ से सर्वाधिक 48 का हुआ था चयन

डॉर्क रूम सहायक की नियुक्ति में सर्वाधिक 48 का गृह क्षेत्र लखनऊ दर्ज है। इसके अलावा 21 का इटावा लिखा गया है,जिसमें 13 लोगों का पता सिर्फ सैफई लिखा हुआ है। इसी तरह नौ का पता मैनपुरी का है। अन्य जिलों से तीन से पांच लोगों का चयन हुआ है।

सात हुए बर्खास्त, फिर भी चुप है स्वास्थ्य विभाग

डॉर्क रूम सहायक के रूप में फर्जी नियुक्ति पत्र पाने वाले सात लोग पूर्व में बर्खास्त किए जा चुके हैं, जबकि एक ने खुद ही नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं खुली। दरअसल एक नाम से दो से तीन लोगों के एक ही जिले में कार्यभार ग्रहण करने के बाद यह सलाल उठा था। उस वक्त असली चयनितों ने अपने जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी से शिकायत की। जिला स्तर पर हुई जांच में फर्जी लाभार्भी अपनी नियुक्ति का प्रमाण पत्र नहीं दे पाए। ऐसे में उन्हें कुछ वक्त बाद बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन, पूरी सूची का सत्यापन नहीं किया गया।
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कार्यभार ग्रहण करने वालों का मिलान नहीं किया

विभाग के आला अफसर पूरे मामले को दबाने में जुटे रहे। पूरी सूची और कार्यभार ग्रहण करने वालों का मिलान नहीं किया। इस्तीफा देने वाले का नाम शोभाराम चौधरी था। इसी तरह बर्खास्त होने वालों में हरदोई से अवधेश कुमार, प्रयागराज से दिलीप सिंह, बदायूं से गिर्राज सिंह, कासगंज से जगदीश प्रसाद, गाजियाबाद से राहुल कुमार, औरैया से राजेश कुमार और सिद्धार्थनगर से रीमा चौधरी शामिल हैं।

अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देशित किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने बताया कि प्रकरण में कुछ लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। कुछ नौकरी छोड़ चुके हैं। पत्रावलियां निकलवाई गई हैं। विस्तृत जांच कराई जा रही है।
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