नोएडा के निलंबित मुख्य अभियंता यादव सिंह व उसके करीबियों के नाम से बनी तकरीबन 40 कंपनियों की जानकारी तो सीबीआई के पास पहले ही आ चुकी है।
फिर भी जांच एजेंसी को इस बात का अंदेशा है कि यादव सिंह या उसके करीबियों ने छद्म नामों से कुछ और कंपनियां बनाई हैं, जिनके जरिये बड़ी रकम विदेश भेजी गई है। सीबीआई अब इन फर्मों की तलाश में जुटी है।
सूत्रों के अनुसार जांच से जुड़े अधिकारियों को यह अंदेशा है कि कुछ और फर्में भी बनी हैं, जिनकी जानकारी सामने नहीं आ सकी है। इन फर्मों के यादव सिंह के करीबियों या छद्म नामों पर बने होने का अंदेशा है।
इसकी वजह यह है कि जब सीबीआई ने यादव सिंह के ठिकानों पर छापामारी की थी, उसके चौबीस घंटे पहले ही यादव सिंह व उसके नजदीकी रिश्तेदार, यहां तक कि लखनऊ की बटलर पैलेस कॉलोनी में रहने वाले आईएएस दामाद के घर पर पहले से ताले लटकने लगे थे।