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मदरसों में फर्जी नियुक्ति प्रकरण : एमएलसी ने सीएम को भेजा पत्र, उठाए एसआईटी की जांच पर सवाल 

Thu, 03 Jun 2021 12:03 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने सीएम को पत्र लिखकर कहा है कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा है। किसी उच्चस्तरीय जांच समिति से इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए।
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मदरसा - फोटो : Twitter
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विस्तार
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आजमगढ़ के मदरसों में 13 शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति पर मुकदमा दर्ज कराने के मामले में विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने सीएम को पत्र लिखा है। कहा है कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट झूठ का पुलिंदा है। किसी उच्चस्तरीय जांच समिति से इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए।

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इस प्रकरण में एसआईटी ने 13 शिक्षकों की नियुक्ति गलत बताते हुए 23 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कराया है। इस प्रकरण में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने उल्टा एसआईटी पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सीएम को पत्र भेजकर कहा है कि यह सत्यापन वर्ष 2017 से शुरू हुआ था और वह इसके बारे में भली भांति जानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनकी जांच के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी ने जो समिति गठित की थी वही गलत थी। 

उनमें एक भी सदस्य ऐसा नहीं था जो शिक्षा के नियमों की जानकारी रखता हो। इस  समिति का इरादा तो कुछ और ही था। एसआईटी भी उसी समिति से प्रभावित हो गई और इसी आधार पर अपनी रिपोर्ट दे दी।
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उन्होंने कहा है कि इस जांच में कई विसंगतियां हुई जैसे, एसआईटी ने उस समिति के अध्यक्ष का कोई बयान दर्ज नहीं किया। नियुक्ति के समय के चालीस साल पुराने प्रबंधकों की बजाय वर्तमान प्रबंधकों पर एफआईआर की संस्तुति कर दी। एक जैसे प्रकरण में अलग अलग संस्तुतियां की गईं। जिन प्रकरण में नियुक्ति या पदोन्नति नियमविरुद्ध नहीं हुई है उनमें भी निस्तारण अधिकारी को दोषी मान लिया गया। 

एक रजिस्ट्रार ने जैसा निस्तारण किया उसी तरह के निस्तारण में दूसरे रजिस्ट्रार को दोषी मान लिया गया। जिनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की गई उनके वेतन रोकने संबंधी आदेश पर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश है। जिन नियुक्तियों की जांच हुई वह वर्ष 1974 से 2013 के बीच हुई। 1996 के पूर्व मदरसे शिक्षा विभाग के अधीन थे पर शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी का कोई बयान नहीं लिया गया। 

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