लखनऊ। केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान में दो दिवसीय किसान मेले का आगाज बृहस्पतिवार से हो रहा है। मेले में देश भर 20 से ज्यादा राज्यों के लगभग 5000 किसानों और उद्यमियों के हिस्सा लेने की उम्मीद जताई जा रही है।
संस्थान के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि किसान मेले में वैज्ञानिक-उद्योग और किसान के बीच संवाद का रास्ता खुलेगा। यहां औषधीय व सुगंधित पौधों की उन्नत पौध सामग्री की बिक्री के साथ ही संस्थान के विकसित जिरेनियम व तुलसी की नई प्रजाति का लोकार्पण भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह मेला किसानों और परिश्रम से पैदा हुए उनके उत्पादों के कद्रदान उद्यमियों के बीच सेतु का काम करेगा। मेले में विभिन्न सुदूर पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के साथ ही बस्तर जैसे दुर्गम व आदिवासी इलाकों के किसान भी हिस्सा लेंगे। यहां स्टॉल के जरिए सीएसआईआर संस्थानों के विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
मेले में पहले दिन मुख्य अतिथि के तौर पर उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक डॉ. विजय बहादुर द्विवेदी व विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह मौजूद रहेंगे। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को मुख्य अतिथि के तौर पर मशहूर पर्यावरणविद पद्म भूषण डॉ. अनिल कुमार जोशी और विशिष्ट अतिथि एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी रहेंगे।
ये विशिष्ट किस्में होंगी जारी
सिम-सरस्वती के अलावा गुलाब जैसे सुगंध वाले पौधे जिरेनियम की किस्म ''''''''सिम-संगम'''''''' का लोकार्पण होगा। सिम-सरस्वती तुलसी की बारहमासी और ज्यादा उपज देने वाली प्रजाति है और इसमें बीज भी आते हैं। डॉ. उमेश चंद्र लवानिया व उनकी टीम के प्रयास से बनी सिम-सरस्वती तुलसी प्रजाति में ठंड के प्रति सहनशीलता ज्यादा है।
जिरेनियम की परफ्यूम उद्योग में भारी मांग है और दुनिया भर में इसका निर्यात होता है। डॉ. लईक उर रहमान खास व उनकी टीम के प्रयास से विकसित सिम-संगम प्रजाति की खास बात यह है कि इसे भारत के उत्तरी मैदानों के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म में बरसात में भी फंगस नहीं लगता।