फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

KGMU: हीमोफीलिया के मरीजों पर एक और संकट

Tue, 12 Aug 2014 03:54 AM IST
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
केजीएमयू में हीमोफीलिया के मरीजों की जान बचाने के लिए चढ़ाया जाने वाला फैक्टर खत्म हो गया है। दो महीने पहले शासन से पांच लाख रुपये के फैक्टर खरीद के लिए मिले थे। लगभग डेढ़ हफ्ते में ही फैक्टर खत्म हो गया।
विज्ञापन


इसके चलते हीमोफीलिया के मरीजों के इलाज में संकट का सामना करना पड़ रहा है।

एक मरीज को एक बार में चार वायल लगभग एक हजार यूनिट फैक्टर देना होता है। एक बार में 12 हजार रुपये और साल भर में एक मरीज पर एक लाख से अधिक का खर्च होता है।

इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाती है। लेकिन लगातार बजट न मिलने के कारण दिक्कतें आती रहती हैं। हीमोफीलिया में शरीर के रक्त का थक्का (जमना) बनाने की क्षमता खत्म हो जाती है।
विज्ञापन


इससे मरीज के शरीर में चोट लगने पर रक्त नहीं जमता और रक्तस्राव होने लगता है। ये रक्तस्राव आंतरिक और बाहरी दोनों हो सकता है। थक्का न जमने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव से उसकी जान जोखिम में पड़ जाती है।
विज्ञापन


एंटी हीमोफीलिया फैक्टर देकर मरीज को बचाया जा सकता है। अधिकतर हीमोफीलिया पीड़ितों में एफ-8 और एफ-9 प्रोटीन की कमी होती है।

इन फैक्टर की कमी इंजेक्शन देकर दूर की जाती है। चोट बाहरी हो या अंदरूनी ये इंजेक्शन 15 मिनट में असर दिखाते हैं। इसमें एक बड़ी समस्या अपंगता की है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें