प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में भी विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार किए जाएंगे। मानक पूरे करने वाले अस्पतालों को इसके लिए चुना जाएगा। इसके बाद नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) इनमें डीएनबी (डिप्लोमेट इन नेशनल बोर्ड) पाठ्यक्रम शुरू करेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर यह कवायद शुरू की गई है। प्रदेश में अभी तक सिर्फ राजधानी के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में तीन विषयों में डीएनबी पाठ्यक्रम चल रहा है।
अस्पतालों में विशेषज्ञ की कमी को दूर करने के लिए अस्पतालों में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने की कवायद शुरू हुई है। इससे अस्पतालों को रेजीडेंट डॉक्टर भी मिल जाएंगे।
गौरतलब है कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) के डीएनबी पाठ्यक्रम को एमडी और एमएस के बराबर ही मान्यता है। एनबीई अपने मानकों के आधार पर अस्पतालों का चयन करता है।
अस्पतालों में अनुभवी शिक्षकों के आधार पर ही डीएनबी के लिए सीटों का आवंटन होता है। एमडी-एमएस की तरह ही डीएनबी तीन वर्ष का पाठ्यक्रम है और एमबीबीएस करने के बाद यह कोर्स विशेषज्ञता के लिए किया जाता है। इसमें भी डॉक्टर को मेडिकल कॉलेजों की तरह ही पढ़ाई होती है।