रोड शो के दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव
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गठबंधन के बाद सपा और कांग्रेस की ताबड़तोड़ रैलियां हो रही हैं। जादुई आंकड़े को हासिल करने के लिए हर दांव आजमाए जा रहे हैं। पर, इस गठबंधन का भविष्य क्या होगा, इसको लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
विश्लेषक बताते हैं कि 1993 से सूबे में चुनाव पूर्व गठबंधन का दौर तेज हुआ जो छोटे स्तर पर हर चुनाव में किसी न किसी दल के बीच होता रहा। हालांकि चुनौती पेश करने वाले गठबंधन 1993 और 1996 के ही माने गए, पर वे सफल नहीं हुए।
सपा और कांग्रेस बीच हुए ताजा गठबंधन की सीमाएं भी नजर आने लगी हैं। वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल बताते हैं कि कांग्रेस के पराभव के बाद ही चुनाव पूर्व गठबंधन की शुरुआत हुई थी। 1993 में सपा व बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा और 176 सीटें जीतीं।
गठबंधन ने 31 फीसदी से ज्यादा वोट खींचे, लेकिन पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सका। तत्कालीन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव सरकार बनाने में तो सफल हुए लेकिन 1995 के गेस्ट हाउस कांड से सपा-बसपा के रिश्ते ऐसे खराब हुए कि कभी पटरी पर नहीं आ सके।
समझौते के तहत चलीं सरकारें
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आगे चलकर यह गठबंधन टूट गया। भाजपा व बसपा ने समझौता कर सरकार बनाया, लेकिन यह प्रयोग भी कारगर साबित नहीं हुआ और 1996 में ही विधानसभा के आम चुनाव की नौबत आ गई।
गठबंधन का आधार कितना कमजोर था, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि भाजपा ने चुनाव बाद बारी-बारी से सरकार बनाने का बसपा को ऑफर दिया तो कांग्रेस के साथ चुनाव लड़कर आई इस पार्टी ने भाजपा से हाथ मिला लिया।
सबसे बड़े दल के रूप में उभरी भाजपा के साथ समझौते के तहत सरकारें चलीं।
आंकड़ों में गठबंधन
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1993 सपा-बसपा गठबंधन
सपा 256 पर लड़ी 109 जीती वोट मिले- 19.94 प्रतिशत
बसपा 164 पर लड़ी 67 जीती वोट मिले-11.12 प्रतिशत
भाजपा 422 पर लड़ी 177 जीती वोट मिले 33.30 प्रतिशत
1996 बसपा-कांग्रेस गठबंधन
बसपा 296 पर लड़ी 67 जीती वोट मिले 19.64 प्रतिशत
कांग्रेस 126 पर लड़ी 33 जीती वोट मिले 8.35 प्रतिशत
भाजपा 414 पर लड़ी 174 जीती वोट मिले 33.52
भाजपा के गठबंधन : वर्ष 2002 में भाजपा राष्ट्रीय लोकदल, अपना दल, लोकतांत्रिक कांग्रेस और जनता दल यू सहित कई दलों की साझेदारी में चुनाव लड़ी थी। उसने 319 प्रत्याशी उतारे, जिनमें से 88 पर ही जीत पाई। वर्ष 2007 में भाजपा ने अपना दल व जेडीयू से गठबंधन किया। भाजपा 350 सीटों पर लड़ी, लेकिन महज 51 सीटें ही जीत पाई। 2012 में भाजपा का अपना दल से गठबंधन हुआ। भाजपा 398 सीटों पर लड़ी और 47 सीटों पर सिमट गई।
कांग्रेस ने पिछली बार भी किया था गठबंधन : कांग्रेस ने 2012 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन किया था। कांग्रेस 355 और रालोद 46 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। कांग्रेेस ने 28 सीटें हासिल की जबकि रालोद ने नौ सीटें जीती थीं।