मिड-डे-मील के नाम पर होने वाली धांधली पर लगाम लगाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को काम देने के लिए नीति बदलने की तैयारी है। नई नीति में ऐसा प्रावधान किया जा रहा है कि मिड-डे-मील को बांटने की जिम्मेदारी अनुभवी संस्थाओं को दी जाए। इससे छोटे एनजीओ अपने-आप बाहर हो जाएंगे।
बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित स्कूलों व माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील योजना में खाना दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रसोइया रखकर खाना बनवाया जाता है और शहरी क्षेत्रों में स्वयंसेवी संस्थाओं से खाना बंटवाया जा रहा है।
स्थिति यह है कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में खाना नहीं मिल पा रहा। कुछ संस्थाओं पर घटिया खाना देने का आरोप है। इसलिए मध्याह्न भोजन प्राधिकरण चाहता है कि मिड-डे-मील योजना से छोटी संस्थाओं को हटाकर बड़ी संस्थाओं को जिम्मेदारी दी जाए।