आसपास के माहौल का मानसिक जीवन पर बड़ा असर है। डॉ. राव ने बताया कि अलग-अलग वातावरण में जो भी जानकारी होती है वो हमारे दिमाग में स्टोर हो जाती है। उसके बाद जो भी आगे की जानकारी मिलती है उसके अनुसार हमारा दिमाग पुरानी जानकारी को बदलता रहता है।
दिमाग में केमिकल रिलीज होते रहते हैं। ब्रेन में मौजूद डोपोमिन नाम का केमिकल अधिक डिक्रीज होने से शरीर पैरालाइज्ड भी हो सकता है। दिमाग में केमिकल बढ़ जाता तो व्यक्ति उत्तेजित होने लगता है और उसका मानसिक संतुलन खो जाता है।
फिजियोलॉजी विभाग की एचओडी प्रो. सुनीता तिवारी ने बताया कि अगर हर रोज कुछ देर खुली हवा में टहला जाए तो काफी हद तक स्ट्रेस से निजात मिल सकती है। खुली हवा में टहलने से एंडारफिंस नाक का केमिकल रिलीज होता है, जो सकारात्मक सोच पैदा करता है।