ड्राई आई होने पर आंखों में आंसू कम बनते हैं। आंखें शुष्क होने पर आंखों में जलन बनी रहती है। आंखों में सूजन रहती है। यहां तक कि आंख के सामने की सतह पर घाव का निशान पड़ सकता है। कभी-कभी आंखों में खरोंच का अहसास होता है। आंखों में पानी आना भी ड्राई आई सिंड्रोम का लक्षण हो सकता है। यह स्थिति लेसिक व मोतियाबिंद के सर्जरी के नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
बच्चों को न थमाएं फोन
बच्चा खाना नहीं खा रहा, रो रहा और लाख जतन के बाद भी चुप नहीं हो रहा या फिर ज्यादा शैतानी कर रहा है, तो अक्सर लोग बच्चे के हाथ में मोबाइल पकड़ा देते हैं। बच्चों को फुसलाना ही है तो टेलीविजन चला दें, पर उनके हाथों से मोबाइल ले लें।
मोबाइल गेम, वीडियो से बचें
युवाओं के पास दिनभर की थकान मिटाने और दिमाग को आराम देने का तरीका है मोबाइल पर गेम, सोशल मीडिया पर चैटिंग और तमाम साइट्स पर वीडियो देखना। बच्चे-युवा सभी रात में बिस्तर में घुसकर घंटों मोबाइल पर गेम खेलते, फिल्में देखते हैं। हर हाल में ये आदतें छोड़नी होंगी।
- कम हो जाता है पलक झपकना : कमरे की लाइट बंद कर मोबाइल पर आंखें गड़ाना नुकसान करता है। इससे पलक झपकने की दर कम हो रही है। आंखें लाल होने पर बार-बार धो लेते हैं। यह सब उनकी समस्या को बढ़ा रहा है।
- पुतली को नहीं मिल पाती ऑक्सीजन: डॉ. अरुण शर्मा कहते हैं कि आंखों की पुतली में खून की धमनियां होती हैं। पुतली के आगे टीयर फिल्म होती है, जिससे यह ऑक्सीजन लेता है। जब हम फोन लगातार देखते हैं, पलक झपकाते नहीं तो ऑक्सीजन पुतली तक नहीं पहुंच पाती।
- एसी भी नुकसानदेह : रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. संजय कुमार विश्नोई कहते हैं कि लोग ज्यादातर एसी कमरों में रहने लगे हैं, इससे भी आंखों का पानी सूख रहा है।
उपाय: 30 सेकंड तक बंद करें आंखें
बच्चे हों या युवा आधे घंटे से अधिक मोबाइल या कम्प्यूटर का इस्तेमाल न करें। यदि करना मजबूरी है तो कामकाजी लोग काम के बीच में 30 से 35 सेकंड आंख बंद करके बैठ जाएं। इससे पुतली को ऑक्सीजन की सप्लाई होती रहेगी।