पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के नजदीकी पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने बुधवार को यहां भाजपा का दामन थाम लिया। उनके साथ एक और पूर्व आईपीएस अधिकारी ज्ञान सिंह व पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बुधवार को यहां दोनों लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
साथ ही उम्मीद जताई कि इनके आने से पार्टी मजबूत होगी। बृजलाल ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रवादी विचारों से प्रभावित होने के कारण उन्होंने इस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया। बृजलाल ने कहा कि उनकी भूमिका के बारे में पार्टी नेतृत्व फैसला करेगा। राजनीतिक हलकों में बृजलाल का भाजपा में शामिल होना बसपा और मायावती के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
बृजलाल ले अपनी शुरुआती दिनों में अपराधियों, माफिया और गैंगस्टर के खिलाफ मुहिम चलाई थी। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) का गठन किया था।
यूपी में दलित वोटों की राजनीति में भाजपा
लोकसभा चुनाव के दौरान मिला दलित वोटों का साथ बीजेपी आगे भी बरकरार रखना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी की कोर टीम के साथ ही मोर्चो में भी यूपी के चेहरों को तवज्जो दी जा रही है। बुधवार को घोषित की गई राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की टीम में यूपी से चार चेहरों को जगह मिली है।
यूपी में दलित वोटों पर नजर का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि यहां क्षेत्रवार चार लोगों को राज्य प्रभारी बनाया गया है। गोपाल पछेरवाल, सुरेश राठौर, केके राज और स्वरूप चंद रंजन के नाम इसमें शामिल हैं। वैसे बीजेपी पिछड़ा-दलित गठजोड़ मजबूत करने की कवायद तभी शुरू हो गई थी जब लोस के नतीजों के बाद आगरा के सांसद रामशंकर कठेरिया को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था।
दूसरी ओर संघ और उसके आनुषांगिक संगठन सामाजिक समरसता के बहाने भी दलित वर्ग में अपनी पैठ बनाने में लगे हुए हैं। बीजेपी ने विशेष सदस्यता अभियान भी इसके लिए चलाया था। इसका असर यह है कि यूपी में बीएसपी, सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।
तेज तर्रार आईपीएस रहे हैं बृजलाल
सिद्धार्थनगर के छोटे से गांव गुजरौलिया खालसा के बेहद गरीब परिवार में जन्मे बृजलाल 1977 बैज के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी रहे हैं। पुलिस महकमे में शायद ही कोई ऐसा जिला हो, जहां की पुलिस या फिर अपराधी बृजलाल के नाम से परिचित न हो।
सरकारें चाहे जो रही हों, चाहे भाजपा या फिर खुद समाजवादी पार्टी या फिर बसपा, हर सरकार ने उनकी प्रशासनिक क्षमता, अपराधियों से जूझने और फिर उसे अंजाम तक पहुंचाने की प्रवृत्ति के चलते उन्हें हमेशा कानून-व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी।
दलित वोट के आईने में देखा जाए तो बृजलाल अनुसूचित जाति की कोरी जाति से वास्ता रखते हैं। सियासी नजरिये से भाजपा का यह कदम पूर्वांचल में कमजोर भाजपा के लिए मिशन-2017 की ठोस शुरुआत माना जा रहा है। जहां तक कोरी वोट की बात है तो पूर्वांचल में सुल्तानपुर, गोण्डा, फैजाबाद के अलावा बुंदेलखण्ड में इनकी ज्यादा संख्या में है।
ईमानदारी कई बार पड़ी थी भारी
बृजलाल को वैसे बसपा सरकार की सख्त कानून-व्यवस्था का चेहरा भी माना जाता था। इनकी ईमानदारी और साफगोई के चलते कई बार उन्हें पुलिस सेवा में दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। उनकी इसी छवि के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने उन्हें 1991 में मेरठ में एसएसपी बनाया।
उन्हें समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 1989 में इटावा का एसएसपी भी बनाया। वह पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार में लखनऊ के एसपी सिटी बनाए गए।
बृजलाल प्रदेश के अकेले ऐसे आईपीएस अधिकारी रहे हैं, जिन्हें केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की सिफारिश पर लंबे समय तक सुरक्षा दी गई। एसएसपी पीलीभीत रहने के दौरान आतंकियों का पीछा करते हुए वह पंजाब तक पहुंच गए और अपने दो सिपाहियों को मारने वाले आतंकियों को अंजाम तक पहुंचाया। इसी वजह से वह आतंकियों की हिट लिस्ट में आए। केंद्र ने उन्हें 25 आदमियों की लंबी-चौड़ी सुरक्षा दस साल तक दी।