सुविधाओं से महरूम सूबे की बस्तियों में राजकीय हाईस्कूल खोले जाएंगे। इन स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों से बेहतर सुविधाएं बच्चों को दी जाएंगी।
राज्य सरकार इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रस्ताव भेजेगी। इसके लिए जिलों से ऐसी बस्तियों की सूचना मांगी गई है।
इसी आधार पर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) के तहत यह प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। प्रदेश में मौजूदा समय इस योजना के तहत 1021 राजकीय हाईस्कूल चल रहे हैं।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय ने इस बार तय किया है कि हर असेवित यानी सुविधाओं से महरूम बस्तियों में एक-एक राजकीय हाईस्कूल खोल दिए जाएं।
इन स्कूलों के खुलने का सबसे अधिक फायदा यह होगा कि बच्चों को घर के आसपास सरकारी स्कूल की सुविधा हो जाएगी और अभिभावकों को प्राइवेट स्कूलों में अधिक फीस नहीं देनी होगी।
इसके आधार पर ही जिलों से शहरों और गांवों का सेटेलाइट मैप तैयार कराने को कहा गया है। इससे यह साफ हो जाएगा कि प्रदेश में कितनी असेवित बस्तियां हैं और कितने स्कूलों की जरूरत होगी।
बालिका छात्रावास पर जोर
बच्चों को राजकीय हाईस्कूल की सुविधा उनके घर के आसपास उपलब्ध कराने के साथ छात्राओं को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है।
इस बार केंद्र को ब्लॉकों में बालिका छात्रावास बनाए जाने का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा। हर छात्रावास में कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाली 100 लड़कियों को रखने की व्यवस्था होगी।
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक तथा गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की छात्राएं इसमें रहने के लिए पात्र होंगी।
प्रस्ताव तैयार करने का प्रशिक्षण
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत तैयार होने वाले प्रस्ताव के लिए राज्य परियोजना निदेशालय में 21 जनवरी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
राज्य परियोजना निदेशक जितेंद्र कुमार ने इस संबंध में जिलाधिकारियों को निर्देश भेजा है। इसमें कहा गया है कि प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए जरूरी दस्तावेज के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों को भेजा जाए ताकि प्रस्ताव बनाने में दिक्कतें न हों।