कोरोना महामारी के दौरान मदरसों में की गई नियुक्तियों की बाबत प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने एक अप्रैल 2020 से की गई नियुक्तियों का पूरा ब्यौरा रजिस्ट्रार उप्र मदरसा शिक्षा परिषद से मांगा था। पहले तो इसमें टाल मटोल की गई, पर रिमाइंडर भेजने पर सूचनाएं प्रेषित कर दी गईं। इन सभी की जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच में सामने आया कि आजमगढ़ मंडल में ही लगभग सौ नियुक्तियां, प्रयागराज में तीस से ज्यादा, कानपुर में 20 से ज्यादा नियुक्तियां दी गई हैं। बताया जा रहा है कि कुल तीन सौ से ज्यादा नियुक्तियां इस अवधि में की गईं। विशेष सचिवों ने अपनी रिपोर्ट में मामले की विस्तृत जांच की सिफारिश की है।
बड़ा सवाल : छात्र लगातार कम हो रहे तो नियुक्तियों में जल्दबाजी क्यों
अहम सवाल यह भी है कि मदरसों में छात्र लगातार कम हो रहे हैं। फिर ऐसी जल्दी में नियुक्तियों की क्या आवश्यकता थी? वर्ष 2016 में मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं में कुल 4 लाख 22 हजार 667 विद्यार्थी रजिस्टर्ड थे। वर्ष 2017 में यह संख्या घटकर तीन लाख 71 हजार 52 रह गई। वर्ष 2018 में दो लाख 70 हजार 755, वर्ष 2019 में दो लाख छह हजार 337, वर्ष 2020 में एक लाख 82 हजार 259, वर्ष 2021 में एक लाख 82 हजार थे। इस वर्ष 2022 में एक लाख 63 हजार 999 छात्र ही रह गए हैं।