लखनऊ। व्यावसायिक सिलिंडर की किल्लत की वजह से खानपान से जुड़े छोटे कारोबारियों और रेहड़ी-पटरी वालों ने घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। हालांकि, नियमों के उल्लंघन वाली इस तरकीब से भी जिले में खानपान कारोबारी की पूरी दाल नहीं गल सकी है। ऐसे में बुधवार को भी 60 फीसदी से ज्यादा छोटे-बड़े प्रतिष्ठान बंद ही रहे।
चौक, हजरतगंज से लेकर गोमतीनगर तक सड़क किनारे की खानपान की अस्थायी दुकानों की जगह बुधवार को सन्नाटा ही नजर आया। चौक इलाके में लगातार दूसरे दिन अधिकतर दुकानें नहीं खुलीं। खानपान वाले बहुत से दुकानदार धड़ल्ले से घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करते भी नजर आए। पूछने पर इन व्यापारियों ने कहा कि अगर हम ऐसा न करें भला कितने दिन तक दुकान बंद रखेंगे? हालांकि, घरेलू गैस का जुगाड़ भी कारोबार को पूरी तरह से उबार नहीं सका है।
चौक के चरक चौराहे पर सड़क किनारे की 10 से ज्यादा खानपान की दुकानें बंद रहीं। सोया चाप, कबाब रोल की दुकान पर काम करने वाले लवकुश ने बताया कि दो दिन से दुकान बंद है। जब सिलिंडर मिलेगा तभी दुकान खुल सकेगी। इसके पास की चाट हाउस व अन्य स्नैक्स की दुकानें भी बंद थीं। वहीं, पक्की दुकानों वाले रेस्टोरेंट भी बंद रहे।
रेस्टोरेंट संचालक अनूप पांडेय ने बताया कि सिलिंडर है नहीं तो दुकान कैसे खोलें? सबसे ज्यादा परेशानी श्रमिकों की है जो अब खाली बैठे हैं। उनको कब तक खाली बैठाए रखेंगे। हर एक दुकानदार को पर हर दिन 15 से 20 हजार का नुकसान हो रहा है।
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नहीं बनीं मिठाइयां, सिर्फ दुकानें खुलीं
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इंदिरानगर के मिठाई कारोबारी व उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि व्यावसायिक के साथ-साथ घरेलू सिलिंडर भी नहीं मिल पा रहा है। इंदिरानगर की ज्यादातर मिठाई की दुकानों पर मंगलवार से ही कामकाज बंद है। पहले से जो ऑर्डर लगे थे, सिर्फ उनको पूरा किया गया है। अब गैस बची नहीं है तो चाट का काउंटर भी बंद कर दिए गए हैं। पहले से बनी मिठाइयों को बेचने के लिए ही दुकानें खुली हैं।
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कोयला भट्टी और इंडक्शन का लिया सहारा
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चारबाग के मिठाई कारोबारी अनिल विरमानी ने बताया कि कहीं से भी गैस सिलिंडर नहीं मिला। लिहाजा, उन्होंने कोयला भट्टी और इंडक्शन का सहारा लिया है। अभी तक सिर्फ तंदूर के लिए भट्टी काम आती थी। गैस न मिलने से वापस 40 वर्ष पुराने दौर में लौट रहे हैं। वहीं, गैस की परेशानी से बचने के लिए चार इंडक्शन भी खरीदे हैं जिनसे किसी तरह दुकान का काम चला रहे हैं।
पैसा देने के बाद भी नहीं मिल रहा सिलिंडर
कुछ व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम ज्यादा पैसे देने को तैयार हैं, फिर भी सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। साइकिल से डिलीवरी देने वाले एक व्यक्ति ने 950 रुपये का घरेलू सिलिंडर 2000 रुपये का दिया, वह भी सिर्फ एक। किल्लत की वजह से लोग बिना बहस किए ले भी रहे हैं। व्यावसायिक सिलिंडर अब 5000 रुपये देने पर भी नहीं मिल रहा है।
गैस सिलिडर के लिए परेशान लोग।