फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: 4500 साल पहले भी सोने की बारीक तौल जानते थे लोग

Thu, 10 Sep 2026 02:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। करीब 4500 साल पहले गंगा घाटी में रहने वाले लोग खेती और सामान्य जीवन के साथ धातुकर्म की उन्नत तकनीक से भी परिचित थे। उन्हें सोने को बेहद छोटे आकार में ढालने, उसकी सटीक तौल करने और लेन-देन में इस्तेमाल करने की समझ थी। मुजफ्फरनगर के मांडी गांव से मिले करीब 3000 सूक्ष्म स्वर्ण सिक्कों के अध्ययन में इसके प्रमाण मिले हैं। करीब 4500 से 4000 वर्ष पुराने ये सिक्के वर्तमान में लखनऊ के राज्य संग्रहालय में सुरक्षित हैं।
विज्ञापन

ये जानकारी बुधवार को सप्रू मार्ग स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता में पूर्व डीजीपी, नेशनल ट्रस्ट फॉर प्रमोशन ऑफ नॉलेज के चेयरमैन और इंडियन जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजी के चीफ एडिटर विजय कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि मांडी से मिले पुरातात्विक सिक्कों का वजन बेहद कम है। अलग-अलग सिक्कों का वजन 0.04 ग्राम से 1.61 ग्राम तक है। इतने छोटे आकार में सोने को तैयार करना उस समय की धातुकर्म तकनीक और कारीगरी की दक्षता को दर्शाता है।
रत्ती से भी कम वजन की सटीक गणना
अध्ययन में सूक्ष्म तौल व्यवस्था के संकेत भी मिले हैं। विजय कुमार के अनुसार, भारत में रत्ती और तोला जैसी वजन इकाइयों का इस्तेमाल प्राचीन समय से होता रहा है। कम मात्रा में सोने की तौल के लिए राई और सरसों के बीज जैसे प्राकृतिक मानकों का उपयोग किया जाता था। मांडी के सिक्के बताते हैं कि उस दौर में बेहद कम मात्रा में सोने को तौलने और उसका हिसाब रखने की व्यवस्था विकसित थी।
विज्ञापन

व्यापार और तकनीकी समझ के प्रमाण
इन सिक्कों से केवल आर्थिक गतिविधियों ही नहीं बल्कि गणितीय ज्ञान, धातुकर्म और व्यापारिक व्यवस्था की जानकारी मिलती है। इनका अध्ययन गंगा घाटी की ओचर कलर्ड पॉटरी (ओसीपी) संस्कृति को समझने में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें