लखनऊ में आधी आबादी की सुरक्षा को लेकर पुलिस कतई संवेदनशील नहीं है। इसका नतीजा है कि शोहदे और बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामला हसनगंज कोतवाली के ठीक पीछे का है।
छेड़छाड़ व मारपीट का मुकदमा दर्ज कराने से चिढ़े शोहदे ने अपने नाबालिग दोस्त संग शुक्रवार शाम पीड़ित महिला को फिर परेशान किया। विरोध पर उसकी पिटाई कर केरोसिन उड़ेलकर फूंकने की कोशिश की।
इस पर बहादुर महिला शोहदों से भिड़ गई और शोर मचाने लगी। चीख पुकार सुनकर मुहल्ले के लोग दौड़े तो शोहदे धमकी देते हुए भाग निकले। इसके बाद पीड़िता मुहल्ले की महिलाओं के साथ कोतवाली पहुंची तो एक घंटे तक इंस्पेक्टर पीके झा मिलने ही नहीं आए।
इससे नाराज महिलाओं ने कोतवाली का घेराव कर हंगामा किया। पुलिस पर कार्रवाई के बजाय लीपापोती का आरोप लगाकर तहरीर दी। तकिया मुंशीगंज में रहने वाली पीड़ित महिला ने बताया कि मुहल्ले के शकील ने दो दिन पहले उससे छेड़छाड़ व मारपीट की थी।
पीड़िता की तहरीर पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज करके बैठ गई। मुकदमा लिखाए जाने से नाराज शकील ने शुक्रवार शाम अपने नाबालिग साथी संग काम के सिलसिले में घर से निकली महिला को दबोच लिया।
आरोप है कि शोहदों ने महिला से छेड़छाड़ की। विरोध पर उसकी धुनाई कर मिट्टी का तेल उड़ेलकर फूंकने की कोशिश की। महिला की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और महिला को बचाया।
हंगामा बढ़ते देखकर लिखी रिपोर्ट
डेमो
- फोटो : डेमो पिक
मामले की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम में देने संग पीड़िता कोतवाली पहुंची। करीब एक घंटे तक गेट पर महिलाएं खड़ी रहीं लेकिन, इंस्पेक्टर पीके झा झांकने तक नहीं आए।
इससे नाराज महिलाओं ने कोतवाली पर हंगामा करके पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो शोहदों की हिम्मत ना बढ़ती।
वहीं, महिलाओं ने दरोगा चंद्रप्रकाश यादव पर टरकाने का आरोप लगाया। आरोप है कि दरोगा महिलाओं की बात सुनने की बजाय उन्हें ही कसूरवार ठहराने लगा। पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को सख्त कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया।
पीड़ित महिला ने बताया कि शोहदों ने पिटाई के बाद उसके ऊपर मिट्टी का तेल उडे़ल दिया था। शोहदों ने माचिस की तीली जलाने की कोशिश लेकिन वह केरोसिन में भीग गई और नहीं जली। वरना दुस्साहसिक शोहदे अपने मंसूबे में सफल हो जाते।
घटना के बाद मुहल्ले की कई महिलाएं कोतवाली पहुंच गई और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मी महिलाओं को पहले टरकाने में लगे रहे। हंगामा बढ़ता देख पुलिसकर्मियों ने उन्हें शांत कराया। तहरीर लेकर मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली। महिलाओं का आरोप था कि पुलिस पीड़ितों की समस्याएं सुनने की बजाय उन्हें ही टरकाने में लग जाती है।