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Lucknow News: शायरी और गायिकी के साथ यूफोरिया बैंड ने मचाया धमाल

Mon, 22 Dec 2025 02:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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रेपर्टवा फेस्टिवल के चौथे और अंतिम दिन जनेश्वर मिश्र पार्क में रविवार को दर्शकों की आमद सबसे ज्
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लखनऊ। रेपर्टवा फेस्टिवल के चौथे और अंतिम दिन जनेश्वर मिश्र पार्क में रविवार को दर्शकों की आमद सबसे ज्यादा रही। साहित्य, संगीत, रंगमंच और हास्य से सराबोर इस महोत्सव में स्टैंडअप कॉमेडी, लाइव बैंड्स के साथ ही लोगों ने स्वादिष्ट व्यंजन का लुत्फ उठाया और हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी की। वसीम बरेलवी की शायरी और अंकुर तिवारी के गीतों का श्रोताओं ने खूब आनंद उठाया। वहीं अम्बा नाटक में महिला सशक्तीकरण का एक अलहदा रूप देखने को मिला।
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गायक अंकुर तिवारी ने सबसे पीछे हम खड़े..., दिल बेपरवाह... और जीने में आए मजा... जैसे गीतों को अपनी सुरीली आवाज में गिटार के साथ गुनगुनाया तो श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूमते रहे। रंग थियेटर में अतुल कुमार के निर्देशन में व्यंग्यात्मक नाटक अम्बा का मंचन हुआ, जो एरिस्टोफेनीज के लिसिस्ट्राटा से प्रेरित है। इसमें अम्बा के नेतृत्व में महिलाएं एक बेतुके युद्ध के खिलाफ हड़ताल करती हैं। युद्ध रोकने के लिए महिलाएं फैसला करती हैं कि वे युद्ध थमने तक संभोग नहीं करेंगी। इस नाटक में महिलाओं की इच्छाशक्ति, एकजुटता और रचनात्मक प्रतिरोध को दिखाया गया।
स्टैंडअप कॉमेडी में गुरलीन पन्नू ने अपने बेबाक अंदाज और कटाक्ष से दर्शकों को बांधे रखा। शाम को ताल के मंच पर साइलेंट डिस्को में डीजे डॉ. सांग्रिया के अफ्रो-इनफ्यूज्ड मेलोडिक टेक्नो ने युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। रेपर्टवा की अंतिम शाम यूफोरिया बैंड के नाम रही जिसमें ग्रुप ने धूम पिचक धूम... जैसे गीतों से खूब धमाल मचाया। माएरी... और महफूज... समेत अन्य गीतों पर उन्होंने मौजूद दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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तेरी नजर में हूं तो सबकी नजर में हूं ...

रेपर्टवा में शब्द मंच पर दोपहर की गुनगुनी धूप के बीच मशहूर शायर वसीम बरेलवी ने अपनी शायरी और अंदाज से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने पढ़ा- लगता तो बेखबर सा हूं, लेकिन खबर में हूं, तेरी नजर में हूं तो मैं सबकी नजर में हूं। इसके बाद उन्होंने सुनाया - चर्चे हमारे फन के कहां पर नहीं हुए, लेकिन हम अपने आपे से बाहर नहीं हुए। अपनी जमीं को हमने बनाया है आसमां, ऊंचे किसी के कांधे पर चढ़कर नहीं हुए। एक हम कि दर पे दस्तकें देते नहीं थके, एक तुम कि घर पर होके भी नहीं हुए। वसीम बरेलवी ने अपना मशहूर शेर पढ़ा- हम इतने बेअदब होते कहां हैं, अगर सोचे तो फिर सोचे कहां है। बयां करते भी हैं तो दिल की हालत, ये आंसू आंख के होते कहां हैं।

रेपर्टवा फेस्टिवल के चौथे और अंतिम दिन जनेश्वर मिश्र पार्क में रविवार को दर्शकों की आमद सबसे ज्

रेपर्टवा फेस्टिवल के चौथे और अंतिम दिन जनेश्वर मिश्र पार्क में रविवार को दर्शकों की आमद सबसे ज्

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