सीएम अखिलेश यादव के मेगा ड्रीम प्रोजेक्ट इटावा लॉयन सफारी में इसी हफ्ते शेरों की दहाड़ गूंजने लगेगी।
7 अप्रैल को गुजरात के राजकोट से आए एशियाई बब्बर शेर हीर-मोजकब कुबेर अगले दो-तीन दिन में इटावा लॉयन सफारी में उतार दिए जाएंगे। लखनऊ जू से वहां भेजा जाने वाला यह पहला जोड़ा होगा।
बीते दिनों मंत्री और अधिकारियों के लंदन दौरे के बाद पूरे प्रोजेक्ट में हो रही देरी को लेकर अचानक आई इस तेजी के पीछे सपा मुखिया मुलायम सिंह का दबाव और सीएम अखिलेश के कड़े तेवरों को माना जा रहा है। हालांकि पूरे मामले पर आला अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
लॉयन सफारी में प्रजनन केंद्र समेत तमाम तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। फिनिशिंग का कुछ काम बाकी है।
प्रोजेक्ट के तहत जनवरी 2014 में यहां एक साथ आठ नर-मादा एशियाई बब्बर शेरों को उतारा जाना था, लेकिन गुजरात से चार अन्य शेरों को लाए जाने की अनुमति का मामला करीब एक माह से सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) के पास लंबित पड़ा है।
सूत्रों की मानें तो पूरे मामले पर बारीकी से नजर रखे सपा मुखिया और खुद सीएम अखिलेश ने हाल ही हुई एक मीटिंग में आला अधिकारियों को जल्द से जल्द इटावा लॉयन सफारी में एकाध जोड़े को उतारे जाने के लिए कहा।
इसके तहत बीते दिनों लखनऊ जू, कानपुर जू और सफारी प्रोजेक्ट के आला अधिकारियों की प्रोजेक्ट हेड समेत सचिव स्तर की हुई बैठक में इसे लेकर प्लान भी बना।
लक्ष्मी-विष्णु भी पहुंचेंगे
हीर-मोजकब कुबेर को सफारी में उतारे जाने के बाद उन्हें प्रजनन के लिए साथ लाया जाएगा।
पिछले अप्रेल से दोनों लखनऊ जू के बलरामपुर लॉयन हाउस बाड़े में अप्रैल से ही रह रहे हैं, लेकिन अलग-अलग।
इसे लेकर बीते दिनों वन्यजीव प्रेमी सांसद मेनका गांधी दोनों को साथ लाने के लिए सीएम को पत्र भी लिख चुकी हैं।
माना जा रहा है कि हीर-मोजकब कुबेर की पहली मेटिंग प्लान के बाद कानपुर जू से लक्ष्मी-विष्णु को भी महीने के अंत तक सफारी में उतारा जा सकता है।
मोदी की बहराइच रैली के बाद बदले हालात
माना जा रहा है कि 8 नवंबर को बहराइच रैली में गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के बयान के बाद से सपा सरकार के इस मेगा ड्रीम प्रोजेक्ट में उथल-पुथल मचा है।
सूत्रों की मानें तो मोदी की रैली के बाद उसी रात खुद सीएम ने बदले में गुजरात को दिए जाने वाले वन्यजीवों का सारा ब्यौरा जुटाया और इसे अपने फेसबुक वॉल पर अपडेट किया।
इस कवायद के बाद से ही सीजेडए में शेरों को गुजरात से लाए जाने की अनुमति की प्रक्रिया धीमी पड़ गई और नवंबर में ही आने वाले चार और शेरों का इंतजार दिसंबर के अंत तक खिंच गया।
इसे देखते हुए बीते दिनों सीएम ने लंदन दौरे से लौटे दल को जनवरी की बजाय दिसंबर में ही इटावा सफारी में शेरों को उतारे जाने पर चर्चा की।