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छोटा सा दाना भी बन सकता है आपके लिए बड़ी मुसीबत, पढ़े ये खबर

Mon, 13 Jun 2016 03:44 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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‌बिंदु - फोटो : amar ujala
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छोटी-सी दिखने वाली समस्या अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। पर, ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। बाराबंकी की बिंदु (25) के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। बिंदु की नाक पर छोटा-सा दाना निकला।
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धीरे-धीरे यह दाना ऑप्थैल्मिक नर्व यानी आंख की जरूरी नस को नुकसान पहुंचाने लगी। नौबत यह आ गई कि उसकी आंख की रोशनी जा सकती थी। 

समय रहते लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी बीमारी को पकड़ लिया और उसकी आंख की रोशनी जाने से बच गई। बिंदु जिसे छोटी-सी समस्या समझ रही थी वह हरपीस जॉस्टर था।

डॉक्टरों का कहना है कि  इसका संक्रमण बढ़ जाता तो अपंगता का दंश देने के साथ ही जानलेवा भी हो सकता था। बिंदु को चेहरे, पेट और सिर में तेज दर्द की शिकायत के साथ लोहिया अस्पताल के सर्जरी वार्ड में 31 मई को भर्ती कराया गया।
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एक जून को अस्पताल के निदेशक डॉ.पद्माकर सिंह, फिजीशियन डॉ. संदीप चौधरी और डॉ. एमएल भार्गव राउंड ले रहे थे। राउंड के समय तीनों डॉक्टरों ने उसके नाक के दाहिनी तरफ छोटा-सा दाना देखा। 

अगले दिन उसी दाने की जगह दूसरा दाना निकल आया। फिजीशियन डॉ. संदीप चौधरी ने मामले को गंभीरता से लिया और अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. अतुल मिश्रा के पास रेफर कर दिया। 

नेत्र सर्जन ने जांच के बाद मरीज को ‘हरपीस जॉस्टर’ से पीड़ित होने की पुष्टि कर दी। डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि मरीज को इंफीरियर कैंथस वैराइटी का हरपीस था। इसमें आंख के भीतर निचले हिस्से में संक्रमण शुरू होता है।
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कई महंगे इंजेक्शन और दवाओं का करना पड़ा इस्तेमाल  

डेमो
धीरे-धीरे आंख सूजन के साथ बंद होने लगती है। कुछ समय बाद आंख बंद होने के साथ उसकी रोशनी भी खत्म होने लगती है। डॉ. संदीप के मुताबिक हरपीस का दाना बिंटू की ऑप्थैलमिक नर्व को नुकसान कर रहा था। इसमें रोशनी जाने का खतरा काफी अधिक रहता है

डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि मरीज की बीमारी पता चलने के बाद बिना देर किए इलाज शुरू किया गया। कई महंगे इंजेक्शन और दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ा। 

मरीज की आंख बचाने के लिए फिजीशियन, सर्जन, नेत्र सर्जन और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगी रही जिसमें टीम ने कामयाबी हासिल की। सात दिन बाद संक्रमण खत्म हुआ और वह फिर से देखने लगी। 

डॉ. संदीप ने बताया कि हरपीस जॉस्टर से पीड़ित मरीज का इलाज लोहिया अस्पताल में एक रुपये के पर्चे पर किया गया। इलाज के लिए करीब दो हजार की दवा बाहर से लोकल पर्चेज के तहत अस्पताल प्रशासन ने खरीदी। 

डॉ. संदीप बताते हैं कि यही इलाज प्राइवेट अस्पताल में कराया जाता तो कम से कम 40 हजार रुपये का खर्च आता। हरपीस जॉस्टर मौजूदा मौसम में ही एक्टिव होता है। जिन लोगों को कभी चिकन पॉक्स हुआ रहता है वो इसकी चपेट में अधिक आते हैं। 

ऐसे में शरीर के किसी हिस्से में दाना आए तो नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।  अधिक गर्मी और बीच बीच में बरसात के साथ गंदगी की चपेट में आने वाले लोग इसके शिकार होते हैं।
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