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यूपी का रण : समीकरणों की परीक्षा कल, पहले चरण में 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदाता भी हैं तैयार

Wed, 09 Feb 2022 07:30 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

विधानसभा के चुनावी महासमर में बृहस्पतिवार को पहली हुंकार है। जिन 11 जिलों की 58 सीटों पर 10 फरवरी को मतदान होना है, वहां प्रचार थम गया। अब जनता के फैसले की बारी है।
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Up Election 2022 - फोटो : Istock
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विस्तार
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यूपी विधानसभा के चुनावी महासमर में बृहस्पतिवार को पहली हुंकार है। जिन 11 जिलों की 58 सीटों पर 10 फरवरी को मतदान होना है, वहां प्रचार थम गया। अब जनता के फैसले की बारी है। सभी दलों ने पूरा जोर लगाया। हर दांवपेच आजमाया। सियासी दलों को, उम्मीदवारों को अपने-अपने समीकरणों पर एतबार है। उनकी बातों का, वादों का, इरादों का कितना रंग चढ़ा, अब इन सबके इम्तिहान की बारी है। मतदाता किसी अगर-मगर में नहीं। उसने मन बना लिया है। फैसला लिखा जा चुका है। बस सुनाना बाकी है।

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सबसे पहले बातें योद्धाओं की। 58 सीटों पर निर्दलीयों समेत 623 उम्मीदवार मैदान में हैं। हर सीट पर मुकाबला दिलचस्प है। क्योंकि, भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन की ओर से खूब हुंकार भरी गई। खूब तीखी बयानबाजी हुई। इस सबके बीच कभी ये पलड़ा, तो कभी वो पलड़ा भारी दिखा। वहीं, इन अन्य दलों के मतदाता खामोशी से सारी चालों पर नजर रखे हुए थे। ये खामोश मतदाता उलटफेर कर सकते हैं।

शामली : किसका गुल खिलाएगा कैराना
शामली जिले की तीन विधानसभा सीटों में से सबसे हॉट कैराना रही है। कैराना के पलायन का मुद्दा अन्य सीटों पर भी असर दिखा सकता है। बहरहाल, भाजपा ने फिर से मृगांका सिंह को मैदान में उतारा, तो सपा ने भी विधायक नाहिद हसन पर ही दांव लगाया है। पूर्व सांसद बाबू हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका इस बार यहां सारे समीकरणों पर काम किया है। वहीं, मुस्लिम बहुल सीट होने के कारण सपा-रालोद ने यहां मुस्लिम और जाट कार्ड खेला। हालांकि, कांग्रेस ने मो. अखलाक को टिकट देकर मुस्लिम वोटों में सेध लगाने की कोशिश की है। बसपा ने यहां से राजेंद्र उपाध्याय को टिकट दिया है। गन्ना मंत्री सुरेश राणा की सीट होने के कारण थानाभवन पर भी सबकी नजर है। भाजपा ने यहां से सुरेश राणा को ही फिर से टिकट दिया है, तो रालोद के अशरफ अली ने भी खूब ताल ठोकी। मुकाबला सीधा है और दोनों पक्ष ध्रुवीकरण की तलाश में हैं। शामली में वैसे मुकाबला भाजपा बनाम रालोद साफ नजर आ रहा है। हालांकि, बाकी दलों को भी हल्के में लेना भूल होगी।
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मुजफ्फरनगर : ध्रुवीकरण के हथियार की भी परीक्षा
मुजफ्फरनगर इस बार भी ध्रुवीकरण कराता दिख रहा है। यह अलग सवाल है कि इसका असर किस हद तक हुआ। चाहे दंगे का जिक्र हो या किसान आंदोलन का, गन्ने का मुद्दा हो या फिर सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था का, मुजफ्फरनगर के दंगल में सारे प्रयोग किए जा चुके हैं। सदर में भाजपा और रालोद ने पूरी ताकत झोंकी है। बुढ़ाना, चरथावल, पुरकाजी में कड़े मुकाबले हो रहे हैं। सपा-रालोद गठबंधन ने यहां गन्ना भुगतान और कृषि कानून को मुद्दा बनाया। वहीं, भाजपा ने यहां सुरक्षा का बार-बार जिक्र किया। दंगों की तपिश की बार-बार याद दिलाई। सदर सीट पर मौजूदा विधायक कपिलदेव अग्रवाल अपने पारंपरिक वोटों के सहारे चुनावी मैदान में हैं। सुरक्षा  आदि मुद्दे पर बात कर रहे हैें रालोद ने सौरभ स्वरूप को टिकट दिया है। बसपा ने पिछड़ों पर दांव लगाते हुए पुष्पांकर पाल को चुनावी मैदान में उतार दिया। इसी तरह से मीरापुर सीट पर भी भाजपा से प्रशांत कुमार गुर्जर और रालोद से चंदन चौहान पर दांव लगाया गया है।

नोएडा : दिग्गजों के मुकाबले दिलचस्प
नोएडा से भाजपा से पंकज सिंह चुनावी मैदान में हैं, तो गठबंधन ने सुनील चौधरी पर दांव लगाया है। मुकाबला यहां भी जोरदार है। हालांकि, बसपा के मनवीर भाटी को कम आंकना गलत होगा। जेवर सीट पर भाजपा ने धीरेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है। उधर, मीरापुर में भाजपा विधायक अवतार सिंह भड़ाना ने इस बार सपा-रालोद गठबंधन से ताल ठोकी है। ऐसे में यहां भी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां बसपा से नरेंद्र भाटी मैदान में हैं।

प्रतिष्ठा का प्रश्न बनीं मेरठ की सीटें
मेरठ की कई सीटें इस बार प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई हैं। सिवालखास सीट पर जिस तरह सेे रालोद में टिकट को लेकर विरोध हुआ, रूठना-मनाना चला, उससे इस सीट पर सबकी नजरें हंै। यहां भाजपा के मनिंदरपाल और गठबंधन के गुलाम मोहम्मद के बीच तगड़ी टक्कर है। सरधना सीट भाजपा के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम की वजह से हॉट है। मुकाबले में सपा के अतुल प्रधान हैं और इस बार पूरी मजबूती से ताल ठोक रहे हैं। मुकाबला यहां भी सीधा ही नजर आ रहा है। हस्तिनापुर अपने मिथकों को तोड़ पाएगा या नहीं, इसको लेकर  सबकी नजर है।  किठौर, कैंट, शहर और मेरठ दक्षिण में भी इस बार किसी की राह आसान नहीं है। मेरठ में भाजपा ने जहां अति पिछड़ों, ब्राह्मण, त्यागी, वैश्य के समीकरण बनाए, तो वहीं गठबंधन ने मुस्लिम और जाटों पर डोरे डाले। हालांकि, भाजपा भी यह मान रही है कि जाट उनकी तरफ भी हैं। बसपा ने अपने दलित मतदाताओं के अलावा उनपर भी भरोसा जताया, जो उसकी सोशल इंजीनियरिंग में आते हैं।

बागपत : समीकरणों की लड़ाई
बागपत में ऊंट किस करवट बैठेगा, इस पर भी सबकी निगाहें लगी हुई हैं। रालोद का अभेद्य दुर्ग कहे जाने वाले छपरौली में मुकाबला कड़ा है। बागपत सीट पर पूर्व मंत्री स्व. कोकब हमीद के पुत्र अहमद हमीद रालोद से चुनावी मैदान में हैं, तो भाजपा से विधायक योगेश धामा। यहां मुकाबला बेहद टक्कर का है। इसी तरह से बड़ौत में भाजपा से विधायक केपी मलिक मैदान में हैं, तो टक्कर पर रालोद से जयवीर सिंह तोमर। जयवीर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं और दोनों के ही बीच तगड़ा मुकाबला है। जाटों के अलावा मुस्लिम, यादव व अन्य का समीकरण बनाने की गठबंधन ने पूरी कोशिश की। वहीं, भाजपा ने बागपत की तीनों सीटों के लिए अलग-अलग समीकरण बनाए। बड़ौत में अति पिछड़ों के अलावा वैश्य मतदाताओं पर उसकी नजर रही है। चूंकि, यहां भाजपा के प्रत्याशी भी जाट हैं तो उनकी तगड़ी पकड़ इन वोटरों पर भी रही है। इसी तरह से बागपत में योगेश धामा के भी जाट होने के चलते जाटों में तगड़ी सेंध लगा रहे हैं। हालांकि, यहां गठबंधन मुस्लिम, जाट तथा यादवों के सहारे चुनावी रण में है। गुर्जरों पर भी सबकी नजर रही है। भाजपा इन्हें अपने खेमे में गिन रही है, तो गठबंधन अपने में।

गाजियाबाद-हापुड़ की हवा क्या कहती है
गाजियाबाद में भी मुकाबला दिलचस्प है। लोनी में सपा-रालोद से पुराने दिग्गज मदन भैया मैदान में उतर गए, तो भाजपा से विधायक नंद किशोर गुर्जर मैदान में हैं। बसपा ने अय्यूब खान को उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है, क्योंकि इस सीट पर बड़ी आबादी मुस्लिमों की है। मोदीनगर में भाजपा के अजित पाल त्यागी और रालोद से पूर्व विधायक सुदेश शर्मा मैदान में हैं। उधर बसपा ने पूनम गर्ग पर दांव लगाया है। हापुड़ की धौलाना सीट पर पिछली बार बसपा के असलम अली चुनाव जीते थे पर इस बार वह इसी सीट से सपा रलोद गठबंधन से चुनावी मैदान में कूदे हैं। उधर, भाजपा ने भी टिकट बदला ओर धर्मेश तोमर को मैदान में उतारा। यहां मुकाबला सीधा है, पर बसपा भी यहां तगड़ी सेंध लगा रही है।

बुलंदशहर : जातीय समीकरण लाएंगे रंग
बुलंदशहर के स्याना की बात करें तो यहां भाजपा ने लोधी वोटों को देखते हुए ही देवेंद्र लोधी पर दांव लगाया, तो गठबंधन ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए दिलनवाज खान को टिकट दिया। बसपा और कांग्रेस ने यहां ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए क्रमश: सुनील भारद्वाज और पूनम पंडित को टिकट दिया है। इसी तरह से भाजपा ने शिकारपुर पर ब्राह्मण कार्ड खेला है।

आगरा-अलीगढ़ में भी चुनौती
आगरा में भाजपा की पूरी लहर चली। विधायक से लेकर निकायों तक के पदाधिकारी भाजपा के चुने गए। इस बार मुकाबला तगड़ा है। चाहे एत्मादपुर हो या आगरा कैंट, दोनों में ही तगड़ी टक्कर है। आगरा दक्षिण से योगेंद्र उपाध्याय और गठबंधन से ज्ञानेंद्र उपाध्याय मैदान में हैं, तो बसपा ने ब्राह्मण पर दांव लगाते हुए रवि भारद्वाज को टिकट दिया है। आगरा ग्रामीण से बेबीरानी मौर्य को भाजपा ने चुनावी रण में उतारा है, तो गठबंधन ने महेश जाटव को। इसी तरह से फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, फतेहाबाद बाह में भी मुकाबला जोरदार है। दलितों का काफी वोट होने के कारण आगरा में बसपा भी बेहद मजबूती से चुनाव लड़ रही है। मायावती खुद यहां सम्मेलन कर चुकी हैं और बसपा के सभी उम्मीदवार यहां बेहद मजबूती से चुनावी रण में हैं। अलीगढ़ में भाजपा ने मुक्ता राज को मैदान में उतारा है तो गठबंधन ने जफर आलम को। बसपा ने रजिया खान को टिकट दिया है। अलीगढ़ की सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या होने के कारण मुकाबले तगड़े और दिलचस्प हो गए हैं।

मथुरा में खूब चली जोर आजमाइश
मथुरा की मांट सीट इस चुनाव में खूब चर्चा का विषय रही। आठ बार के विधायक और दिग्गज श्यामसुंदर शर्मा यहां फिर से बसपा से चुनावी रण में हैं। उधर, गठबंधन ने संजय लाठर को टिकट दिया है। दरअसल, यहां भी गठबंधन के टिकट पर रार रही और पहले टिकट योगेश को दे दिया गया। बाद में संजय लाठर ने यहां से अपना दावा किया तो टिकट बदल दिया गया। भाजपा ने यहां से राजेश चौधरी को मैदान में उतारा है। इसी तरह से बलदेव, गोवर्धन और मथुरा में भी मुकाबला रोचक है। 

 

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कई जगह बसपा भी कर सकती है खेल

खतौली में विक्रम सैनी और राजपाल सैनी में सीधी टक्कर नजर आ रही है, पर बसपा के करतार भड़ाना ने इस मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

  • सिवालखास में गुलाम मोहम्मद गठबंधन से हैं तो भाजपा से मनिंदरपाल लेकिन बसपा से नन्हे प्रधान भी हैं। पश्चिमी उप्र में  ऐसी तमाम सीटें हैं जहां बसपा तगड़ा खेल कर रही है और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए मुकाबलों को त्रिकोणीय बना रही है।
  • बुढ़ाना में हाजी अनीस को टिकट देकर बसपा ने पेच फंसाया है। चरथावल में भी पूर्व मंत्री सईदुज्जमा के बेटे सलमान सईद को टिकट देकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया गया है।
  • मीरापुर में मो. सालिक को टिकट दिया गया है। गढ़मुक्तेश्वर सीट पर मदन चौहान को टिकट देकर बसपा ने यहां मुकाबला रोमांचक बना दिया है।
  • सिकंदराबाद सीट पर बसपा ने गुर्जर कार्ड खेला। यहां मनवीर गुर्जर को मैदान में उतार दिया। खेरागढ़ सीट पर गंगाधर कुशवाहा को टिकट देकर बसपा ने तगड़ी चोट की है। 20 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां बसपा की सोशल इंजीनियरिंग का काफी असर नजर आ रहा है।
  • इसी तरह से कांग्रेस ने भी कई जगह दांव खेला है। मेरठ की शहर सीट पर कांग्रेस ने रंजन शर्मा को टिकट देकर जबरदस्त पेच फंसाया है। मीरापुर में ही कांग्रेस ने मौलाना जमीन को टिकट दिया है।
  • मेरठ दक्षिण पर नफीस सैफी को मैदान उतारकर सैफी वोटों को लेने की तगड़ी कवायद की है।
  • इनकी प्रतिष्ठा है दांव पर

विस  और भाजपा  सपा-रालोद  बसपा  कांग्रेस के उम्मीदवार

  • कैराना      मृगांका सिंह नाहिद हसन राजेंद्र उपाध्याय मो. अखलाक
  • थानाभवन   सुरेश राणा अशरफ अली  जहीर मलिक सत्यम सैनी
  • शामली    तेजेंद्र सिंह निर्वाल प्रसन्न चौधरी   बिजेंद्र मलिक मो अयूब जंग
  • बुढाना    उमेश मलिक राजपाल बालियान हाजी अनीस देवेंद्र कश्यप
  • चरथावल    सपना कश्यप पंकज मलिक सलमान सईद   डा. यासमीन
  • पुरकाजी      प्रमोद ऊटवाल अनिल कुमार सुरेंद्र पाल सिंह दीपक कुमार
  • मुजफ्फरनगर   कपिलदेव अग्रवाल सौरभ स्वरूप  पुष्पांकर पाल सुबोध शर्मा
  • खतौली   विक्रम सैनी  राजपाल सैनी करतार सिंह भड़ाना  गौरव भाटी
  • मीरापुर      प्रशांत गुर्जर चंदन चौहान मोहम्मद सालिम  मौलाना जमील
  • सिवालखास  मनिंदर पाल सिंह गुलाम मोहम्मद  मुकर्रम अली  जगदीश शर्मा
  • सरधना      संगीत सोम अतुल प्रधान संजीव धामा सैयद रियानुद्दीन
  • हस्तिनापुर    दिनेश खटीक योगेश वर्मा संजीव जाटव अर्चना गौतम
  • किठौर     सत्यवीर त्यागी शाहिद मंजूर  केपी मावी बबिता गुर्जर  
  • मेरठ कैंट   अमित अग्रवाल मनीषा अहलावत  अमित शर्मा  अवनीश काजला
  • मेरठ        कमल दत्त शर्मा रफीक अंसारी  दिलशाद शौकत  रंजन शर्मा
  • मेरठ दिक्षण   सोमेंद्र तोमर मोहम्मद आदिल   दिलशाद अली नफीस सैफी  
  • छपरौली    सहेंद्र सिंह रमाला अजय कुमार  साहिक चौधरी यूनुस चौधरी
  • बड़ौत     केपी मलिक  जयवीर सिंह तोमर  अंकित शर्मा राहुल कश्यप
  • बागपत    योगेश धामा अहमद हमीद  अरुण कसाना     अनिल देव त्यागी
  • लोनी     नन्द किशोर गुर्जर मदन भैया आकिल चौधरी यामीन मलिक
  • मुरादनगर   अजीत पाल त्यागी सुरेंद्र कुमार मुन्नी   हाजी अयूब बिजेंद्र यादव
  • साहिबाबाद    सुनील शर्मा  अमरपाल शर्मा  अजीत कुमार पाल संगीता त्यागी
  • गाजियाबाद   अतुल गर्ग  विशाल वर्मा  कृष्ण कुमार सुशांत गोयल
  • मोदीनगर    डॉ मंजू सिवाच सुदेश शर्मा डॉ पूनम गर्ग  नीरज कुमारी
  • धौलाना     धर्मेश तोमर   असलम चौधरी वासिद प्रधान  अरविंद शर्मा
  • हापुड़   विजय पाल आढ़ती  गजराज सिंह  मनीष सिंह   भावना
  • गढ़मुक्तेश्वर   हरेंद्र  सिंह रविंद्र चौधरी मदन चौहान आभा चौधरी
  • नोएडा     पंकज सिंह सुनील चौधरी  कृपा राम शर्मा पंखुड़ी पाठक
  • दादरी     तेजपाल सिंह नागर राजकुमार  मनवीर भाटी दीपक भाटी
  • जेवर    धीरेंद्र सिंह अवतार सिंह भड़ाना नरेंद्र भाटी मनोज चौधरी
  • सिकंदराबाद   लक्ष्मीराज सिंह राहुल यादव मनवीर गुर्जर सलीम अख्तर
  • बुलंदशहर     प्रदीप चौधरी हाजी यूनुस     कल्लू कुरैशी सुशील चौधरी
  • स्याना        देवेंद्र सिंह लोधी दिलनवाज खान  सुनील भारद्वाज पूनम पंडित
  • अनूपशहर    संजय शर्मा     केके शर्मा रामेश्वर लोधी गजेंद्र सिंह
  • डिबाई        सीपी सिंह  हरीश कुमार    केपी सिंह सुनीता शर्मा
  • शिकारपुर     अनिल शर्मा     किरनपाल सिंह मोहम्मद रफीक  जियाउर्रहमान
  • खुर्जा        मीनाक्षी सिंह बंशी सिंह    विनोद जाटव तुक्कीमल
  • खैर  अनूप प्रधान  भगवती प्रसाद चारू कैन    मोनिका सूर्यवंशी
  • बरौली  जयवीर सिंह प्रमोद गौड नरेंद्र शर्मा  गौरांग देव चौहान
  • अतरौली  संदीप सिंह  वीरेश यादव  डॉ. ओमवीर सिंह धर्मेंद्र कुमार
  • छर्रा      रविंद्रपाल सिंह लक्ष्मी धनगर तिलकराज यादव अखिलेश शर्मा
  • कोल     अनिल पाराशर अज्जू इशहाक  मोहम्मद बिलाल  विवेक बंसल
  • अलीगढ़    मुक्ता राजा जफर आलम राजिया खान  मो. सलमान
  • इगलास    राजकुमार सहयोगी बीरपाल सिंह   सुशील कुमार      प्रीति धनगर
  • छाता चौ. लक्ष्मीनारायण ठा. तेजपाल सिंह  सोहनपाल सिंह पूनम देवी
  • मांट   राजेश चौधरी संजय लाठर  श्याम सुंदर शर्मा सुमन चौधरी
  • गोवर्धन   ठा मेघश्याम सिंह प्रीतम सिंह राजकुमार रावत दीपक चौधरी
  • मथुरा    श्रीकांत शर्मा देवेंद्र अग्रवाल एसके शर्मा प्रदीप माथुर
  • बलदेव पूरन प्रकाश    बबिता देवी अशोक सुमन विनेश कुमार
  • एत्मादपुर    डॉ. धर्मपाल सिंह डॉ. वीरेंद्र सिंह  प्रबल प्रताप सिंह  शिवानी बघेल
  • आगरा कैंट   डॉ. जीएस धर्मेंश कुंवर चंद  भारतेंद्र अरुण   सिकंदर वाल्मीकि
  • आगरा दक्षिण  योगेंद्र उपाध्याय विनय अग्रवाल रवि भारद्वाज अनुज शर्मा
  • आगरा उत्तर   पुुरुषोत्तम खंडेलवाल ज्ञानेंद्र गौतम शब्बीर अब्बास  विनोद कुमार बंसल
  • आगरा ग्रामीण  बेबी रानी मौर्य महेश कुमार  किरण प्रभा उपेंद्र सिंह
  • फतेहपुर सीकरी  चौधरी बाबू लाल ब्रजेश चाहर  डॉ. मुकेश कुमार हेमंत चाहर
  • खैरागढ़    भगवान सिंह  रौतान सिंह   गंगाधर कुशवाहा रामनाथ सिकरवार
  • फतेहाबाद  छोटेलाल वर्मा   रूपाली दीक्षित शैलेंद्र प्रताप सिंह  होतम सिंह
  • बाह   रानी पक्षालिका   मधुसूदन शर्मा  नितिन वर्मा  मनोज दीक्षित 
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