एक उम्मीदवार को जीत के लिए न्यूनतम 37 विधायकों के वोट चाहिए। इस लिहाज से भाजपा अपने आठ उम्मीदवारों को आसानी से जिताने की स्थिति में है। इसके बाद उसके पास सिर्फ 28 विधायकों के वोट बचेंगे। लिहाजा भाजपा को अपने नौवें उम्मीदवार को जिताने के लिए नौ और विधायकों का समर्थन चाहिए।
सपा के नितिन अग्रवाल और निर्दलीय अमनमणि त्रिपाठी के साथ आन के बाद भी यह संख्या 30 ही होती है। इसमें अगर एक और निर्दलीय विधायक विजय मिश्र का वोट जोड़ दें तो भी आंकड़ा 31 तक ही पहुंचेगा। जाहिर है कि भाजपा को नौवें उम्मीदवार की जीत के लिए और छह वोट की व्यवस्था करनी होगी।
विपक्ष का गणित सुधरा
विपक्ष में सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद के विधायकों की संख्या 74 होती है। सपा व बसपा के एक-एक प्रत्याशी की जीत के लिए प्रथम वरीयता के 37-37 वोट यानी 74 वोट चाहिए। नितिन अग्रवाल के भाजपा के खेमे में जाने से विपक्षी विधायकों की संख्या 73 ही रह गई है। पर, राजा भैया और विनोद सरोज ने सपा के साथ खड़े होकर इस समस्या का निराकरण कर दिया है। बशर्ते सपा के अपने 73 विधायकों में कोई क्रॉस वोट न करे।
भाजपा--311
अपना दल--09
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी--04
भाजपा गठबंधन--324
विपक्ष
सपा--47
बसपा--19
कांग्रेस--07
रालोद--01
विपक्ष--74
निर्दलीय या अन्य दल--04