एनआरएचएम से लेकर लैकफेड घोटाले में गले तक फंसे पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर सपा सरकार मेहरबान हो गई है।
यह बदले सियासी समीकरणों का नतीजा है कि जिस सरकार ने विजिलेंस को कुशवाहा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने की इजाजत दी थी, वही उस आदेश को वापस लेने की तैयारी में जुट गई है।
कुशवाहा के खिलाफ किसी भी तरह की जांच या मुकदमा दर्ज करने संबंधी कार्रवाई पर विराम लगाते हुए सरकार ने मुकदमा वापसी से संबंधित आग्रह पत्र पर रिपोर्ट तलब कर ली है।
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राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह विजिलेंस को जो निर्देश दिए, उससे अधिकारियों के कस-बल ढीले पड़ गए हैं। सरकार ने विजिलेंस अधिकारियों को कुशवाहा की बेटी का पत्र भेजा है।
यह पत्र पूर्व मंत्री पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए मामले की फिर से विवेचना कर उन्हें निर्दोष करार देने संबंधी है। मामला ऊपर तक होने की वजह से विजिलेंस अफसर चिट्ठी के मजमून पर चुप्पी साधे हैं।
हालांकि अधिकारी इतना जरूर स्वीकार कर रहे हैं कि पूर्व मंत्री की बेटी के पत्र पर विजिलेंस से सप्लीमेंट्री रिपोर्ट तलब की गई है। इस रिपोर्ट को एक पखवारे में शासन को भेजा जाना है।
इस बीच पूर्व मंत्री के प्रकरण में किसी तरह की कार्रवाई नहीं होनी है। वैसे भी शासन स्तर पर इस मामले की जांच को रोका हुआ था।
गौरतलब है कि विजिलेंस को भले ही सरकार ने जून में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की इजाजत तो दे दी थी लेकिन इसके फौरन बाद ही ऊपर से इशारा हो गया जिससे अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सका।
हालांकि विजिलेंस के अफसर सफाई देते रहे कि मुकदमा दर्ज करने के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट में कुछ तकनीकी खामियां रह गई थीं।
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