लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम में इस बार अंग्रेजी, विज्ञान और गणित जैसे मुख्य विषय छात्रों के लिए बड़ी चुनौती साबित हुए। राजधानी में कुल 1,01,693 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें 15 हजार से अधिक छात्रों का परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। कोई विद्यार्थी एक तो कोई विद्यार्थी दो विषयों में पासिंग मार्क्स न ला पाने के कारण असफल हो गया।
राजधानी के एक निजी विद्यालय के छात्र जितेश कुमार ने इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षा दी। जारी परिणाम में सामान्य अध्ययन में 65 अंक, अंग्रेजी में 50 अंक, भौतिक विज्ञान में 19 अंक, रसायन विज्ञान में 46 अंक और जीव विज्ञान में 56 अंक प्राप्त हुए। भौतिक विज्ञान में पासिंग मार्क्स न आने पर फेल हो गए।
राजधानी के ही एक निजी विद्यालय के छात्र आदित्य कुमार 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए। जारी परिणाम में उन्हें अंग्रेजी और गणित विषय में पासिंग मार्क्स से कम नंबर मिले। हिंदी विषय में 68 अंक, अंग्रेजी में 32 अंक, गणित में 29 अंक, विज्ञान में 30 अंक जबकि सामाजिक विज्ञान में 40 अंक हासिल हुए। हालांकि कुछ विद्यार्थियों के कला विषय में भी कम नंबर आए हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अनुसार, यूपी बोर्ड हाईस्कूल में पंजीकृत 51712 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। इनमें 46111 पास, जबकि 5601 अभ्यर्थी फेल हो गए। इसी तरह इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में पंजीकृत 49969 में से 40359 अभ्यर्थी पास हुए जबकि, 9610 अभ्यर्थियों की पासिंग मार्क्स न आने पर परिणाम बेहतर नहीं रहा।
राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष सत्य शंकर मिश्र ने बताया कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। संबंधित विषय के शिक्षक न होने से पढ़ाई बेहतर नहीं होती है और इसका असर परीक्षा के परिणाम में देखा जा सकता है। विद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता बेहतर करने के लिए जरूरी है कि शिक्षकों की तैनाती किया जाए।
राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय कार्यकारिणी अध्यक्ष व वरिष्ठ शिक्षक जेड आर खान के अनुसार, नियमित कक्षाएं न करने वाले विद्यार्थी ही बोर्ड परीक्षा में फेल हुए हैं। परीक्षार्थी पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं हुए। परिणाम स्वरूप उनका रिजल्ट बेहतर नहीं रहा। मुख्य विषयों के साथ ही हिंदी, सामाजिक विज्ञान और कला जैसे विषयों में भी विद्यार्थी फेल हुए हैं।