सेहत के खतरे का सबब बने एनर्जी ड्रिंक्स को जब्त करने के लिए जल्द ही राजधानी में अभियान चलाया जाएगा।
इसमें केंद्रीय खाद्य संरक्षा व मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से बिना एप्रूवल के बाजार में बेची जा रही तीन कंपनियों की एनर्जी ड्रिंक्स जब्त की जाएंगी। एफएसडीए मुख्यालय के निर्देश पर जिला इकाई ने इसके लिए अलग से टीम गठित कर दी है।
एफएसएसएआई द्वारा बीते दिनों एनर्जी ड्रिक्स के नाम पर बेचे जा रहे जिंगा, क्लाउड नाइन और मॉनस्टर ब्रांड को सेहत के लिए खतरनाक मानते हुए इन्हें प्रतिबंधित कर दिया था।
तीनों एनर्जी ड्रिंक्स के नमूनों की सीएसई लैब में करायी गयी जांच में इसमें सेहत के लिए नुकसानदायक कैफीन और जिंक सिक केमिकल निर्धारित मानक से अधिक पाया गया था। इन एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन 145 पीपीएम था जो मानक से कहीं ज्यादा है।
सेहत के लिए है खतरनाक
स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए इनकी बिक्री रोकने का फैसला हुआ। इसके साथ ही बाजार में मौजूद स्टॉक हटाने का निर्देश कंपनियों को दिया गया था। लेकिन इनकी बिक्री अब भी बाजार में हो रही है।
एफएसडीए मुख्यालय में तैनात एक अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्रालय ने कहा है कि हेक्टर बैवरेज, पुष्पक फूड एंड बैवरेज और मॉनस्टर बैवरेज कॉरपोरेशन के एनर्जी के प्रतिबंधित ब्रांड के एनर्जी ड्रिंक्स यदि कंपनी द्वारा वापस न लिए गए हों तो इनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही पूरा स्टॉक जब्त कर लिया जाए।
इसी के एफएसडीए ने तीनों कंपनियों के एनर्जी सॉफ्ट ड्रिंक्स की बिक्री रोकने के लिए सर्वे का निर्देश दिया है। इस दौरान टीम उन सभी दुकानों व प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण करेगी जहां इनकी बिक्री होने की आशंका है।
रेस्टोरेंट निशाने पर
एफएसडीए अधिकारी बताते हैं कि एनर्जी ड्रिंक्स मुख्य तौर पर कूल कॉर्नर, मॉडल शॉप व रेस्टोरेंट में मिलते हैं। मुख्यतौर पर मॉडल शॉप में बियर के साथ प्रतिबंधित कंपनियों के एनर्जी ड्रिंक्स साफ्ट ड्रिंक के नाम पर बेचे जाते हैं।
लैब टेस्टिंग के दौरान एनर्जी ड्रिंक्स में तय मानक से 44 फीसदी तक अधिक मिले कैफीन व जिंक सिक केमिकल का सेवन पीने वाले को एडिक्ट बनाने के साथ ही उसकी सोचने समझने की क्षमता पर भी प्रतिकूल असर डालता है।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राकेश सिंह बताते हैं कि लगातार ऐसी एनर्जी ड्रिंक्स को पीने से पाचन क्षमता के साथ ही रक्तचाप बढ़ने और दिल की बीमारी का खतरा सकता है।