बलरामपुर अस्पताल में बेडसोर के दर्द से तड़पती बुजुर्ग को इलाज नहीं मिल सका। मरीज की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे केजीएमयू रेफर कर दिया, लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं करवाई।
मरीज के घरवाले डॉक्टरों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन वे नहीं पसीजे। इसके बाद परिवारीजन बुजुर्ग को केजीएमयू ले गए, लेकिन वहां भी उसे भर्ती नहीं किया गया।
इसके बाद परिवारीजन मरीज को लेकर घर चले गए। सीतापुर के बिसवां गांव निवासी सरला देवी (60) को काफी समय से बेडसोर की दिक्कत है।
रविवार देर रात उनके पीठ में तेज दर्द उठा। इसके बाद परिवारीजन सोमवार सुबह उन्हें निजी वाहन से बलरामपुर अस्पताल ले आए। डॉक्टरों ने बुजुर्ग को इमरजेंसी में बेड नंबर बी-29 पर भर्ती कर लिया।
बेटे करुणा शंकर तिवारी ने बताया कि मंगलवार सुबह डॉक्टरों ने बिना कोई इलाज और दवा दिए ही दर्द से कराहती बुजुर्ग को बेड नंबर 23 पर शिफ्ट कर दिया और जांचे लिख दी।
इसके बाद किसी डॉक्टर ने न तो जांच रिपोर्ट देखी और न ही कोई दवा दी। बृहस्पतिवार को वार्ड में राउंड पर पहुंचे डॉक्टर ने मरीज की हालत गंभीर देखते हुए केजीएमयू रेफर कर दिया।
एंबुलेंस नहीं दी। इससे परिवारीजन मरीज को लेकर इमरजेंसी के सामने बने रैन बसेरे के बाहर पड़े रहे और अपने वाहन से केजीएमयू ले गए, लेकिन वहां भी मायूसी हाथ लगी।
रेफर कर जिम्मेदारी से बचते हैं डॉक्टर
करुणा शंकर और परिवार की सदस्य सुषमा देवी ने बताया कि डॉ. एसके नंदा और डॉ. एसएएम रिजवी से मरीज को भर्ती करने के लिए कई बार आग्रह किया, लेकिन किसी ने ना सुनी।
आरोप था कि तीन दिन भर्ती रहने के बावजूद भी मरीज को दो खुराक दवा नहीं मिल सकी तो अस्पताल आने का क्या फायदा।
बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. यूएन राय कहते हैं कि बेडसोर से पीड़ित बुजुर्ग मरीज को केजीएमयू के लिए रेफर करना गलत बात है।
मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने किस आधार पर मरीज को केजीएमयू के लिए रेफर कर दिया। इस बारे में पूछताछ की जाएगी।
वहीं केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार कहते हैं कि बेडसोर के मरीज को केजीएमयू रेफर करना बलरामपुर अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
केजीएमयू में मरीज को प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती करना चाहिए था, लेकिन यहां पर गंभीर मरीजों की भर्ती होती है। ऐसे मरीजों का इलाज जिला अस्पतालों में संभव है।
आए दिन भगाए जाते हैं मरीज
अस्पताल की इमरजेंसी और वार्ड से मरीजों को जबरदस्ती रेफर करने का ये कोई पहला मामला नहीं है। आए दिन गरीब और लाचार मरीजों को डॉक्टर गंभीर बीमारी का बहाना बनाकर केजीएमयू या ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर देते हैं।
डॉक्टरों को इस रवैये से मरीज निजी प्राइवेट अस्पतालों के दलालों के जाल में फंस जाते हैं। यही कारण है कि आए दिन मरीज निजी अस्पतालों के चक्कर में पड़ जाते हैं और इलाज के नाम पर उनसे वसूली की जाती है।
बिना वजह के किए जाते हैं रेफर
केजीएमयू के प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो आए दिन बलरामपुर और सिविल अस्पताल से ऐसे मरीज बिना किसी ठोस वजह के रेफर कर दिए जाते हैं।
कई बार कुछ सामान्य बीमारी के मरीज केजीएमयू रेफर कर दिए जाते हैं जिनका इलाज सिविल, बलरामपुर या लोहिया अस्पताल में संभव है। इससे ही कई बार मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है।