लखनऊ। जीएस एक्सप्रेस प्रा.लि. के मुख्य वित्त अधिकारी डीएस सिंह ने कंपनी के कर्मचारी, आईओसीएल के फील्ड ऑफिसर और पेट्रोल पंप कर्मचारियों समेत 10 लोगों पर 1.05 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया है। डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा के आदेश पर गोमतीनगर पुलिस ने सोमवार को रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
मुख्य वित्त अधिकारी के मुताबिक, उनकी कंपनी वर्ष 2020 से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के फ्लीट कार्ड के जरिये डीजल खरीदती है। इसके संचालन की जिम्मेदारी फैजुल्लागंज निवासी फरहान अहमद खान को दी गई थी। कंपनी के ऑडिट में जनवरी 2024 से अक्तूबर 2025 के बीच करीब 90 लाख रुपये के गबन और सहयोगी कंपनी एबको इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. को 15 लाख रुपये के नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई।
आरोप है कि फरहान ने आईओसीएल के सरस्वती फिलिंग स्टेशन के कर्मचारी अंकुल कौशल, सुनील सिंह और चार अज्ञात कर्मचारियों के साथ मिलकर गड़बड़ी की। पंप प्रबंधक हरि शंकर पांडेय और आईओसीएल के फील्ड ऑफिसर विपुल प्रसाद पर भी मिलीभगत का आरोप है। आरोप है कि फरहान फ्लीट कार्ड के जरिये डीजल की जगह रकम लेता था। बाद में यह रकम उसकी पत्नी को दी जाती जाने लगी।
कंपनी के लेटरहेड के दुरुपयोग का आरोप
मुख्य वित्त अधिकारी के मुताबिक, फरहान ने 12 सितंबर 2024 को कंपनी के लेटरहेड का इस्तेमाल कर पेट्रोल पंप से सीएनजी और ल्यूब्रिकेंट्स के लेनदेन का सत्यापन किया, जबकि कंपनी में इनका इस्तेमाल नहीं होता था। आरोपी से पूछताछ की गई तो उसने अपना जुर्म स्वीकार किया। उसने पूरी रकम कंपनी के लौटाने की बात कही। आरोप है कि बाद में वह मुकर गया और गाली-गलौज करने लगा। गबन की जांच अभी भी चल रही है।
इन पर हुई कार्रवाई
इंस्पेक्टर ब्रजेश चंद्र तिवारी ने बताया कि फरहान, उसकी पत्नी, पंप कर्मचारी अंकुल कौशल, सुनील सिंह, प्रबंधक हरि शंकर पांडेय, आईओसीएल के फील्ड ऑफिसर विपुल प्रसाद और चार अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता से गबन से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह होता है फ्लीट कार्ड
यह एक विशेष प्रकार का पेमेंट या क्रेडिट कार्ड है, जिसका इस्तेमाल व्यवसाय और ट्रांसपोर्ट कंपनियां अपने वाहनों के ईंधन और रखरखाव के खर्चों का प्रबंधन और भुगतान करने के लिए करती हैं।