यूपी से राज्यसभा की जिन 10 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है, अंतिम क्षण तक यही लग रहा था कि विधायकों की संख्या के आधार पर सपा, भाजपा, कांग्रेस व बसपा को मिलाकर कुल जमा दस ही नामांकन होंगे। और इन दलों की ओर से नामांकन करने वाले सभी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे।
मगर, नामांकन खत्म होने से ठीक दो घंटे पहले बगैर प्रस्तावक के हुए एक नामांकन ने कांग्रेस के साथ सपा व भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी।
कांग्रेस प्रत्याशी पीएल पुनिया की ओर से राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने पहुंचकर इस नामांकन पर आपत्ति जताई। कुछ ही देर में कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन कर रही सपा की ओर से कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी भी पहुंचे।
दरअसल, हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कमर अहमद बसपा के पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी के भाई हैं। जिस समय भाजपा प्रत्याशी के रूप में रक्षा मंत्री मनोहर परिकर नामांकन के लिए पहुंचने वाले थे, उसके कुछ क्षण पहले ही कमर भी आ डटे।
पर्रिकर से पहले नामांकन करना चाहते थे
उन्होंने परिकर से पहले नामांकन की कोशिश की लेकिन अधिकारियों ने उनके साथ में प्रस्तावक न होने के आधार पर परिकर के बाद आने को कहा। परिकर नामांकन करके जैसे ही लौटे, कमर रिटर्निंग ऑफिसर प्रदीप कुमार दुबे के समक्ष पहुंच गए।
नामांकन प्रपत्र पर विधायकों के हस्ताक्षर न होने के आधार पर दुबे ने नामांकन स्वीकार करने से मना किया तो कमर व दुबे के बीच बहस शुरू हो गई। कानून व चुनाव प्रक्रिया से जुड़े नियमों को लेकर करीब एक घंटे तक बहस हुई।
दुबे बगैर 10 विधायकों के प्रस्तावक बनेकिसी भी कीमत पर नामांकन प्रपत्र स्वीकार करने को गलत बता रहे थे तो अधिवक्ता नामांकन प्रपत्र स्वीकार करने से इन्कार को ही अवैधानिक बताने की कोशिश करते रहे।
उनका तर्क था कि नामांकन के दिन आवेदन स्वीकार होना चाहिए, यदि उसमें कोई कमी है तो स्क्रूटनी के दिन खारिज कर दें। आखिरकार दुबे ने नामांकन पत्र के साथ एक लिखित आवेदन लिया जिसमें नामांकन प्रपत्रों की खामियों का जिक्र करने को कहा गया।
कमर के साथ एक भी विधायक प्रस्तावक नहीं
इसके बाद उन्होंने कमर से नामांकन की प्रक्रिया पूरी कराई।
कमर के नामांकन की प्रक्रिया चल ही रही थी कि राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी 2.55 बजे पहुंचे। उन्होंने खुद को कांग्रेस प्रत्याशी पीएल पुनिया का चुनाव एजेंट बताते हुए कमर का नामांकन प्रपत्र स्वीकार करने पर आपत्ति जताई।
उन्होंने तर्क दिया कि राज्यसभा के इस चुनाव में विधायक ही प्रस्तावक हो सकते हैं। कम से कम दस विधायक प्रस्तावक होने चाहिए, मगर कमर के साथ एक भी विधायक नहीं हैं।
जिन कथित प्रस्तावकों के नाम इन्होंने दिए हैं, उनमें से एक को छोड़ कोई दूसरा मौजूद नहीं है। नामों में कई बार कटिंग की गई है। उन्होंने अधिवक्ता पर कानून का मखौल उड़ाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की।
अंबिका चौधरी बोले, सभी दस प्रत्याशी जीतेंगे निर्विरोध
कमर के नामांकन की जानकारी जैसे ही सपा खेमे को हुई, पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी भी रिटर्निंग ऑफिसर के पास पहुंच गए।
वे प्रमोद तिवारी के तर्कों का समर्थन करते नजर आए। हालांकि ,उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर से अपनी ओर से कुछ नहीं कहा। मगर, बाद में कहा कि सपा ने चूंकि पुनिया को समर्थन दिया है, इसलिए वह उनका चुना जाना सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है।
नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद चौधरी ने कहा कि सपा से छह, बसपा से दो तथा कांग्रेस व भाजपा से एक-एक नामांकन हुए हैं। जिसे 11 वां नामांकन कहा जा रहा है, वह प्रक्रिया का मजाक है। ऐसे में सभी दस प्रत्याशी 13 नवंबर को तीन बजे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए जाएंगे।
कमर अहमद ने किया मीडिया से किनारा
11 वां नामांकन करने आए वरिष्ठ अधिवक्ता कमर अहमद ने रिटर्निंग ऑफिसर से तो लंबी बहस की मगर, पत्रकारों के किसी भी सवाल का जवाब देने से उन्होंने मना कर दिया।
पत्रकारों के सवालों से किनारा करते हुए चले गए। हालांकि वे यह कहते सुने गए कि जब राज्यसभा के लिए चुनाव राज्य के विधायक करते हैं तो फिर प्रत्याशी बाहर का कैसे हो सकता है।
समझा जाता है कि अधिवक्ता इस चुनावी प्रक्रिया के किसी बिंदु को चुनौती दे सकते हैं।
मनोहर परिकर के नामांकन के दौरान ही भाजपा नेताओं को इस 11 वें नामांकन का अंदेशा हो गया था। शायद यही वजह थी कि परिकर का नामांकन होने के बाद बाकी नेता चले गए लेकिन भाजपा विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल व बावन सिंह सहित तीन विधायक रिटर्निंग ऑफिसर के सामने ही बैठे रहे।
ये विधायक पूरी नामांकन प्रक्रिया पर निगाहें जमाए हुए थे। हालांकि इनमें से किसी ने कोई टिप्पणी नहीं की। बाद में अग्रवाल यह कहते हुए बाहर निकल गए कि यह नामांकन स्वीकार ही नहीं किया जा सकता।
उधर, बसपा की ओर से इस मौके पर कोई नेता नहीं पहुंचा लेकिन बसपा विधानमंडल दल के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पार्टी के विधानमंडल दल कार्यालय में मौजूद थे। वे वहीं से पूरी स्थिति पर नजर गड़ाए रहे।