गैंग काफी ट्रेंड है। वह तकनीकी रूप से भी सक्षम है। गिरोह से जुड़े लोग बेहद सफाई से मीटर के बॉक्स से मशीन निकालकर दूसरी मशीन फिट कर देते हैं। फौरी तौर पर इसका पता लगाना मुश्किल होता है। मीटर खुलने के बाद जब बॉडी और मशीन नंबर का मिलान नहीं होता तब मामला पकड़ में आता है।
- सूत्र बताते हैं कि लखनऊ में ही काफी संख्या में मीटरों की मशीन बदलकर सुस्त मशीन लगाई जा चुकी है। ऐसे मीटरों से पावर कॉर्पोरेशन को राजस्व की चपत लग रही है। वहीं विद्युत लोड बढ़ने से आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सूत्र बताते हैं कि बिजली चोरी अभियान के दौरान ऐसे सुस्त मीटर पकड़े जाते हैं। पर, टीम के अभियंता एवं कर्मचारी मौके सांठगांठ से मामला रफादफा कर देते हैं। कई मामलों में तो अफसर भी कार्रवाई करने के बजाय उसे दबा रहे हैं।
बिजली बिल आधा कर रहा मीटर ठेकेदार
सूत्र बताते हैं कि पुराने शहर के एक मीटर ठेकेदार की अगुवाई में उपभोक्ताओं का बिजली बिल आधा करने का खेल चल रहा है। इस खेल में परीक्षण खंडों के कुछ कर्मचारी शामिल हैं। वहीं, अमीनाबाद, राधाग्राम, चौपटिया, नादान महल रोड, आजादनगर, हुसैनगंज, जवाहर भवन, क्लाइड रोड, कैंट , शिवपुरी चिनहट आदि के कुछ संविदा कर्मी भी इस खेल में शामिल हैं। इस ठेकेदार के गुर्गे परीक्षण खंडों से लाए गए कबाड़ मीटरों की मशीन की चिप बदलकर उसे पहले से तैयार रखते हैं। सुस्त मीटर चाहत रखने वालों की तलाश कर यह उस मशीन को उसके मीटर में फिट कर देते हैं।
उपभोक्ता -- यूनिट
मालती -- 33,853
राजकुमार सिंह -- 24,850
शिवलाल -- 24,046
मोहन सिंह -- 21984
भग्गू राम रावत -- 14,952
मो. फहीम -- 14,448
अविनाश चंद -- 14,020
मो. रेहान -- 9708
प्रगति कुमार -- 6084
राजेंद्र प्रसाद -- 4644
अर्चना उपाध्याय -- 10,167
जॉन कलीकट -- 6713
शंकर लाल -- 11,888
रामस्वरूप -- 18,115
जुबैर बेग -- 17102
संलिप्त कर्मियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
मुख्य अभियंता लेसा ट्रांस गोमती अनिल कुमार तिवारी का कहना है कि बिजली मीटरों से छेड़छाड़ करके मशीन बदलने एवं रीडिंग स्टोर करने वाले उपभोक्ताओं के बारे में जो सूचना मिली, उसी आधार पर कई खंडों में कार्रवाई कराई जा रही है। इस खेल में जिन कर्मियों की संलिप्तता का पता चल रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।