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इस फॉर्मूले से सस्ती हो जाएगी यूपी में बिजली

Thu, 02 Jan 2014 01:00 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार की तर्ज पर प्रदेश में भी घरेलू बिजली की दरें कम की जा सकती हैं।
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बशर्ते... पावर कार्पोरेशन महंगी बिजली खरीदने से परहेज करे और भारी भरकम लाइन हानियों (बिजली चोरी) में कमी लाने के लिए गंभीर हो।

बिजली विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि लाइन हानियों में सिर्फ 5 फीसदी की कमी लाकर घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में तत्काल 25 फीसदी तक की कमी की जा सकती है।
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यही नहीं, प्रदेश के सरकारी विभागों पर ही 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है।

इसे वसूलकर भी बिजली कंपनियों की माली हालत सुधारी जा सकती है। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है।

प्रदेश में बिजली की दरें ज्यादा होने की एक बड़ी वजह निजी परियोजनाओं से महंगी बिजली की खरीद भी है।

पावर कार्पोरेशन की ओर से विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव में वर्ष 2014-15 में खरीदी जाने वाली बिजली की औसत दर 3.95 रुपये प्रति यूनिट बताई गई है जबकि लाइन हानियां 28.2 फीसदी इंगित की गई हैं।
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निजी परियोजनाओं से छह से 7.75 रुपये प्रति यूनिट तक की दर से बिजली की खरीद प्रस्तावित है।

दिलचस्प बात यह है कि 2003-04 तक जहां प्रदेश में बिजली खरीद की औसत लागत 1.72 रुपये प्रति यूनिट थी वह अब बढ़कर चार रुपये प्रति यूनिट तक जा पहुंची है।
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