याचिकाकर्ता अवधेश कुमार वर्मा ने कहा केंद्र सरकार नाजायज तरीक से विदेशी कोयला खरीदने का दबाव बना रही है। घरेलू लिंकेज के आधार पर उत्पादन इकाइयों को 1700 रुपये प्रति टन में कोयला मिल रहा है जबकि आयातित कोयले की कीमत लगभग 17000 रुपये प्रति टन से ज्यादा है। मात्र 10 प्रतिशत विदेशी कोयला खरीदने से ही प्रदेश के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी।
अगर कोल इंडिया बिजलीघरों को करार के मुताबिक कोयला आपूर्ति नहीं कर पा रहा है तो यह किसकी जिम्मेदारी है? वर्मा के मुताबिक पिछले 5 दिनों में झांसी के परीछा बिजलीघर में लगभग 20 रैक कोयला पहुंचा है। इसे उतरवाने के लिए अभियंताओं की ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोयले का कृत्रिम अभाव दिखा कर विदेशी कोयला खरीदने की साजिश की जा रही है। इसकी जांच कराकर साजिश करने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।